लिखते पढ़ते
Saturday, 9 November 2013
दीपावली के उपलक्ष्य पर
पिछली बार की तरह इस बार भी
झालरों के बीच से चेहरा चमकेगा
अकेले ही
दूजा कोई है नहीं न
इस भरे शहर में
लोगों की भीड़ तो ज्यादा है यहां
पर दिलों की भीड़ पर कफ्र्यू सा लगा हुआ है
कोशिश में हूं दीप जलाने की
पता नहीं झालर चमकना कब बंद जाए
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
मुल्क
महान क्रांतिकारी चे ग्वेरा का अंतिम पत्र
9 अक्टुबर,1967 को बोलिविया में अर्नेस्टो चे ग्वेरा की हत्या कर दी गई। इस काम को अमेरिकी ग्रीन बेरेट से प्रशिक्षण हासिल करने वाले बोलिवि...
फकीरों का सेनापति
उड़िया साहित्य का सेनापति ओड़िसा आधुनिक साहित्य में फकीर मोहन सेनापति 'कथा-सम्राट्’ के रूप में आज भी प्रसिद्ध हैं। भारतीय साहित्य...
26 जनवरी
अमर रहे गणतंत्र हमारा.... देश के जुझारू क्रांतिकारियों, देशभक्ति से ओतप्रोत लोगों की अथाह मेहनत व बलिदान के बाद भारत 15 अगस्त सन् ...
No comments:
Post a Comment