Wednesday, 12 March 2014

उस यात्रा का रहस्य....

नानी और उनका घर


वो अकेला ऐसा घर होता था, जहां कुछ भी उल्टा करो सब सीधा हो जाता था। उस घर को ही तो नानी का घर कहा जाता है। कई साल गुजर गए वहां गए हुए। बचपन में बिताए गए उन लम्हों की बारिश आज भी मन के आंगन को बिना इजाजत लिए भिगोकर चली जाती है।
 
कानपुर शहर से तकरीबन चालीस किलोमीटर दूर नेशनल हाइवे के साथ सटा हुआ बसा है मेरा ननिहाल। वहां एक कस्बे के अनुसार सारी मूलभूत जरूरते पूरी होने के सारे संसाधन मौजूद हैं। और मेरे लिए तो शायद हर वो जरूरत जो कहीं और पूरी नहीं हो सकती यहां पूरी हो जाती है।
काफी अरसा गुजर चुका है, जब मैं आखिरी बार वहां गया था। उसदिन सन्नाटा शायद जून के धड़धड़ाते हवारे पर भारी पड़ रहा था। बस भी ऐसी चाल में थी जैसे उसकी यह आखिरी यात्रा हो। बस पर व यात्रियों पर गर्मी और लू के थपेड़ों का असर साफ दिख रहा था।
 
अम्मी का चेहरा इससे पहले मैनें कभी ऐसा नहीं देखा था। पहली बार ऐसा था जब नानी के यहां जाते वक्त जैसे वो मुझे जबरदस्ती लाद के ले जा रहीं थीं। हालांकि मैं तो उन पर बोझ नहीं था मैं तो पापा की गोद को सिंहासन समझ अपने राज्य का स्वतंत्र संचालन कर रहा था। जहां सब मेरे हुक्म का पालन करते थे। तभी बस में शोरगुल शुरु हो गया। मेरा सिंहासन हिल चुका था। पापा और अन्य यात्री बस से उतर कर बाहर खड़े थे।
 
दरअसल एक बिल्ली बस के रास्ते आ अपने जीवन की लीला समा’ कर चुकी थी। या शायद बस ने उसको अपनी चपेट में लिया था। सही-सही कहना थोड़ा मुश्किल है। कुछ देर बाद बस अपने रास्ते पर फिर दौड़ चुकी थी साथ में यात्रियों की तमाम अनहोनी से जुड़ी घटनाओं का दौर लेकर।
इन सब चीजों का असर अम्मी पर बिल्कुल भी नहीं समझ आ रहा था। उनके चेहरे पर अजीब सी बेचैनी और शिकन की रेखाओं के सिवा मुझे कुछ नहीं दिख रहा था। आज मुझसे ज्यादा जल्दी शायद उन्हें नानी के घर पहुंचने की थी। लेकिन ऐसा क्यूं? इस पर मेरा मासूम मन नहीं जा पा रहा था।
 
बस धीरे-धीरे अपनी गति से गतिमान हो रही थी। अब बस का माहौल बेहद शांत लेकिन तनावपूर्ण लग रहा था। आमतौर पर यात्रा के दौरान मैं सो जाया करता था। लेकिन उस दिन आंखों ने नींद पर विजय प्रा’ कर ली थी। शायद अम्मी-पापा के तनाव का असर मेरे ऊपर भी हावी हो चुका था।
बस अब अपने थोभड़े को खोल चुकी थी, जिसकी पों-पों की आवाज सुन दूसरे वाहन रास्ता दे रहे थे। बस की पों-पों तेज हो गई थी वहीं उसकी रफ्तार धीमी। दरअसल भीड़-भाड़ और उस कस्बे की सीमा की शुरुआत हो चुकी थी। जहां मेरे नानी का यानी मेरा सबसे प्यारा घर है।
 
अम्मी अब और अधीर हो रहीं थीं। बस ने अपने पैर स्टैंड पर जमा दिए थे और यात्रियों के पैर खुल चुके थे रास्तों पर दौड़ने के लिए। आज अम्मी इतनी हड़बड़ी में क्यूं हैं? झुंझलाते हुए मैने पापा से शिकायती लहजे में पूछा था। लेकिन पापा के कानों में शायद मेरी आवाज नहीं पहुंच पा रही थी। वो सिर्फ रिक्श्ो को आवाज देने में व्यस्त थे।
 
करीब पांच मिनट बाद हम नानी के दरवाजे पर पहुंच चुके थे। वहां लोगों का जमावड़ा था। माहौल बिल्कुल शांत और बेचैन करने वाला था। ज्यादातर मुझे सफेद लिबाजों में लिपटे लोग ही नजर आ रहे थे। ऐसा सन्नाटा मैनें आज से पहले कभी नहीं महसूस किया। तभी भीड़ से चीरती, कांपती सिसकियां मेरे कानों में किसी अजीज के इस दुनिया से रुखसत होने का संदेशा पहुंचा रहीं थीं। अब अम्मी की अधीरता, चेहरे की शिकन, मन की बेचैनी, पापा की जल्दबाजी और परेशानी का राज मेरी समझ में आ चुका था।

 

Tuesday, 11 March 2014

प्रोपर्टी संसार

घर पाने के लिए गलतियों से बचना जरूरी


एक खूबसूरत घर खरीदने का सपना लगभग हर किसी का होता है। छोटे पूंजी वाले लोगों के लिए घर खरीदना थोड़ा मश्किल होता है। अगर आप घर खरीदने के लिए होम लोन के लिए एप्लाई कर रहे हैं, तो जरूरी है कि उसको पास कराने के लिए उचित प्रक्रिया का पालन किया जाए। वैसे भी कम पूंजी वाले लोगों के लिए घर खरीदने में होम लोन बेहद मददगार साबित होते हैं। लेकिन कुछ गलतियों की वजह से कई लोग इन्हें हासिल करने में नाकामयाब रहते हैं। जानते हैं ऐसी ही कुछ गलतियों के बारे में।

लोन प्रोवाइडर के बारे में कम जानकारी

ज्यादातर केस में देखा जाता है कि लोन लेना वाले व्यक्ति को लोन प्रोवाइडर एजेंसीज या संस्थान के बारे में पूरी और सही जानकारी नहीं होती। वे सिर्फ एडवर्टीजमेंट्स में किए गए लुभावने वायदों व आकर्षक ब्याज दरों के प्रस्ताव या अपने दोस्तों व फैमिली वालों की बातों में आकर फैसला कर लेते हैं। जो बाद में उनके लिए घातक साबित होता है। इसलिए यह जरूरी हो जाता है कि आप पूरी तरह से रिसर्च करें। रिसर्च के लिए आप इंटरनेट की हेल्प से ले सकते हैं। यहां पर आपको इंट्रेस्ट रेट, होम लोन ऑफर्स के बारे में पूरी इंफार्मेशन मिल जाएगी।

एग्रीमेंट में लापरवाही करना

घर खरीदने की जल्दबाजी में हम अकसर प्रापर्टी या लोन से संबधित दस्तावेजों पर गौर नहीं करते जो बाद में हमारे लिए परेशानी का सबब बनती हैं। हम सब को बचपन से बताया जाता है कि कहीं भी साइन करने से पहले वहां लिखे रूल्स एंड रेगुलेशंस को इत्मीनान से क्रॉस चेक कर लेना चाहिए। एग्रीमेंट के डाक्यूमेंट्स में कोई ऐसा नियम या शर्त हो सकती है जो आपको बिल्कुल मंजूर न हो। इसे पढ़ कर क्लियर हो जाएगा कि आप किस परिस्थिति में पैर रखने जा रहे हैं। यदि आपको किसी शर्त पर आपत्ति है तो उसके बारे में बैंक के साथ बात की जा सकती है। और उसे सुलझाया जा सकता है।

कंप्लीट इंफार्मेशन का न होना

अकसर यह बात सामने आती है कि बायर को घर खरीदने से रिलेटेड ज्यादा जानकारी नहीं होती है। जो उनके और घर के बीच रोढ़ा साबित होती है। इसलिए घर खरीदने की प्रक्रिया शुरू करने से पहले आपको अपने लेवल पर सही तरीके से खोज करनी चाहिए। किसी और के प्रदान की गई सूचना पर भरोसा करना आपके लिए नुकसानदायक साबित होता है। इसलिए यह जरूरी हो जाता है कि अगर आप अपनी मनपसंद प्रापर्टी पाना चाहते हैं तो रिसर्च प्रक्रिया बेहद जरूरी है। इस प्रक्रिया के तहत सबसे पहले उन प्रोजेक्ट्स या एरियाज को प्वाइंट आउट करें जो आपके लिए सही और कंफर्टेबल हों।
होम लोन की बात हो तो ध्यान रखें कि आप होम लोन के बारे में कंप्लीट इंफार्मेशन हासिल करें। जिस तरह से आप बाजार में खरीदारी के वक्त विभिन्न दुकानों पर घूम कर अपनी पसंद तथा जरूरत की चीज की तलाश करते हैं ठीक उसी तरह से आपको उपयुक्त होम लोन की खरीदारी करनी चाहिए।

मंथली किस्तों का क्लियरेंस

कई बार लोग लोन लेने के वक्त मंथली किस्तों का अमाउंट जल्दी भरने के लिए ज्यादा करवा लेते हैं। क्योंकि उन्हें लगता है कि वे अपनी मंथली इनकम का 4० से 45 पर्सेंट मंथली किस्त के रूप में अदा कर सकते हैं। हालांकि वे उन खर्चों का ध्यान रखना भूल जाते हैं जो अचानक करने पड़ सकते हैं। इस तरह के गलत आकलन की वजह से आप अपनी क्षमता से अधिक लोन ले लेते हैं। जो बाद में आप पर बोझ बन जाता है। इसलिए यह बेहर जरूरी पहलू है कि आप अपनी मासिक किस्तों के अमाउंट पर ध्यान दें। अगर ऐसा नहीं होता है तो खूबसूरत घर के मालिक बनने का ख्वाब आर्थिक समस्या की वजह से बुरा साबित हो सकता है।

अपनी क्रैडिट रिपोर्ट प्राप्त नहीं करना

बैंक या हाऊसिग फाइनांस कार्पोरेशन के साथ होम लोन संबंधी बातचीत करने से पहले आपको अपनी क्रैडिट रिपोर्ट को किसी तरह की गलती या गड़बड़ के लिए जरूर जांच लेना चाहिए। यदि आपको कोई गलती या गड़बड़ दिखाई दे तो उसे तुरंत चुनौती दें क्योंकि इससे आपका क्रैडिट स्कोर प्रभावित होता है। नकारात्मक क्रैडिट रिपोर्ट आपके लोन लेने की क्षमता पर बेहद बुरा प्रभाव डालती है। अच्छी क्रैडिट रिपोर्ट से आप अधिक लोन लेने के योग्य हो सकते हैं।

एप्लीकेशन में गलत डाटा देना

ज्यादातर होम लोने के एप्लाई करने के लिए हम पहली बार ही जाते हैं। जिस वजह से हमें इस प्रासेस के बारे में सही जानकारी नहीं होती। लोन एप्लीकेशन भरते समय आमतौर पर हम एप्लीकेशन में पूछे गए सवाल के बारे में जानकारी न होने पर उसे खाली छोड़ देते हैं या अनुमान के अनुसार उसमें डाटा फिल कर देते हैं। यह करना हमारे लिए घातक साबित होता है। एप्लीकेशन भरते समय की गई थोड़ी सी भी चूक आपके होम लोन पाने के ख्वाब को मटियामेट कर सकती है। इससे बचने के लिए या तो किसी से परामर्श लें या जानकारी न होने की स्थित में स्वयं बैक या लोन प्रोवाइडर एजेंट या संस्थान जाकर पूरी प्रक्रिया को समझकर ही एप्लीकेशन फार्म को फिलअप करें। ध्यान रहे कि अगर आपके क्रेडिट कार्ड पर अमाउंट बकाया है या पहले से आपने कोई लोन ले रखा है तो यह आपकी होम लोन क्षमता को प्रभावित करेगा। इसलिए एप्लीकेशन में सही डाटा प्रोवाइड करना जरूरी है।

इंश्योरेंस न लेना

इंश्योरेंस किसी भी अनहोनी घटना के वक्त परिवार को बचाने के लिए बेहद मददगार साबित होते हैं। ऐसी किसी भी सिचुएशन से बचने के लिए फैमिली को सिक्योरिटी प्रोवाइड करने के लिए होम लोन का इंश्योरेंस करवाना आवश्यक है। लोन लेने वाले की मृत्यु की स्थिति में लोन की बाकी सारी राशि को बीमा कंपनी अदा कर देती है। इसी प्रकार किसी क्रिटिकल बीमारी पॉलिसी के तहत लोन लेने वाले की आय में किसी गंभीर रोग की वजह से कमी आने पर भी बीमा कं पनी एक तय समय तक किस्तों की अदाएगी करती है।


 

Saturday, 8 March 2014

चालबाज दुनिया में 'मास्टरनी’

'महा-मास्टरनी'

उसे दुनियादारी नहीं पता थी

मौत का मर्सिया पढ़ना उसे नहीं आता था
लेकिन वक्त ने उसको
सिखा दिया सबकुछ
वह भी जो उसे आता था
और वह भी जिससे उसका साबका न था
उन दिनों उस पर वो सब गुजरा
जो उसे कभी कुबूल न था

ये जालिम वक्त
शिला के भी टुकड़े कर देता है
और पानी के वजूद को भी मटमैला
लेकिन अब
वक्त की धार में पैनापन
शायद ज्यादा था
या था ही नहीं
यहां अब सबकुछ उल्टा चल रहा था
दुनिया की नजरों में
लेकिन ये तब उल्टा नहीं था
जब यह उसके साथ घटित हो रहा था

अब मजबूती ने मुट्ठी को
कसकर भींच रखा था
क्योंकि वक्त तो उल्टे का था ना
अब सबके साथ उल्टा होगा सिर्फ उसके सिवा
क्योंकि
वक्त टुकड़ों का गठजोड़ कर चुका था
अब तो वह
चुड़ैल हो चुकी थी
अब हर वो शब्द उसके लिए था
जिन्हें प्रबुद्ध समाज के लोग
अपनी जुबां पर कम
लेकिन दिमाग में हमेशा रखते हैं

मेरी नजरों में तो वह महा-मास्टरनी थी
क्योंकि उसने उन सबको पछाड़ा था
जो खुद को
मालिक समझ बैठे थे
दुनियाभर की 'नारी जाति’ का ।।


 

Wednesday, 5 March 2014

दो कवितायें.....

शब्द सागर


शब्दों के सागर में नाव डाल रखी है
दुम दबाए बैठना
सिखाया गया नहीं कभी
अब हाथ पैर तो मारने ही हैं
क्योंकि रुकना इस समंदर में
मौत को आमंत्रण होगा

अब चीर कर नीर को
आगे बढ़ना है
हों झंझावात चाहे जितने
इसीलिए शब्दों के शिखर
की तलाश जारी है
इस जहां में
सिरमौर बनने की खातिर
................................................ 

यात्रा

दुनिया को समझने की फिराक में
निकला हूं
पहुंचूंगा कहां कुछ पता नहीं
रास्ता तो शायद मिल भी जाए
लेकिन क्या मंजिल सिमटेगी हथेलियों में

कोशिशों के पुलिंदे साथ हैं
क्या उस पुलिंदे में चाभी छुपी है
उस खास दरवाजे की
जिसे सब खोलने में लगे हैं
पक्का यकीं है मुझे
तुम सब भी
मिलोगे  
उसी खास दरवाजे के पास



Sunday, 2 March 2014

चलते चलते...(लघु संस्मरण)


'बरेली’ यात्रा और 'मैं’

यात्रा की शुरूआत हमेशा कौतूहल, उत्सुकता और रोमांच के साथ होती है। लेकिन इसका अंत थकान, नीरसता और उदासी के साथ होता है। इस मसले पर मेरे साथ कुछ उलटा था। 

कल ही यूपी के खूबसूरत और दिलफेंक शहर 'बरेली' की यात्रा पर जाना हुआ।
कभी-कभी आपको पता नहीं होता कि अगले पल आपके साथ क्या होने वाला है। और जब पता ही नहीं होगा तो न कोई प्लानिंग होगी न ही कोई आईडिया।
ठीक ऐसा ही मेरे साथ भी हुआ। मसला कुछ यूं था कि बरेली जाने का फरमान अचानक मेरे पास आ पहुंचा। अब फरमान था सो जाना भी जरूरी। लेकिन रेल रिजर्वेशन/टिकट का कुèछ अता-पता नहीं, जैसे-तैसे नोएडा स्थित पीजी से निकलकर मेट्रो के जरिए दिल्ली रेलवे स्टेशन तक पहुंचा। पहुचने पर पता चला कि ट्रेन प्लेटफार्म पर रेंग चुकी है।
अब मेरा क्या था...जाना कैंसिल...अरे नहीं। ...मैनें ट्रैक पर दौड़ लगा दी, दौड़ा ही था कि टीटी महाशय ने टांग अड़ा दी...अरे वो गिराने वाली टांग नहीं, टिकिट चेक करने वाली टांग। लेकिन मैं तो मैं था, कहां रुकने वाला। लेकिन अफसोस कि रुकना पड़ा, टीटी की खातिर... नहीं...दरअसल आगे रास्ता ही बंद था।
अब टीटी मेरे सामने और मैं उसके सामने। मामला गंभीर हो रहा था। लेकिन इतना गंभीर हो जाएगा पता नहीं था। टीटी के बिहैवियर से मैं स्तब्ध था।
कुछ ही लम्हों बाद ट्रैक पर मेरे दोनों पैर एक-दूसरे को पछाड़ने की कश्मकश में लगे हुए थे। अगले पल कोच का हैंडल मेरे हाथ में था और शरीर कोच में....
.... लेकिन मन उस टीटी के पास ही छूट चुका था...।

 

Thursday, 27 February 2014

नदियां

धरती की नसें हैं नदियां


हमेशा से ही कहा और माना जाता रहा है कि जल ही जीवन है और जल के बिना जीवन जीना बेहद मुश्किल है। दुनियाभर में जल का प्रमुख श्रोत या तो समुद्र हैं या फिर नदियां। नदियां मानव जीवन और पर्यावरण को संरक्षित करने में सहायक साबित होती हैं। मगर अफसोस अब नदियों का जलस्तर मनुष्य की गलतियों की वजह से निरंतर घटता जा रहा है कई नदियों का तो अस्तित्व भी खतरे में है। आइए जानते हैं दुनियाभर की कुछ सबसे विशाल और लंबी नदियों के बारे में।

नील नदी

दुनिया की सबसे लंबी नदी का खिताब इसी को मिला है। यह पूर्वी अफ्रीका से उत्तर और फिर मेडिटेरियन तक 6,65० किलोमीटर के दायरे में फैली हुई है। नील की दो बड़ी सहायक नदियां हैं- व्हाइट नील और ब्लू नील। मिस्र की प्राचीन सभ्यता के विकास में नील नदी की बहुत बड़ी भूमिका मानी जाती है। नील नदी को इसीलिए 'मिस्र का वरदान’ भी कहा जाता है।

अमेजन

करीब 6,4०० किलोमीटर लंबी अमेजन नील नदी के बाद दुनिया की दूसरी सबसे लंबी नदी है। यह नील से थोड़ी-सी छोटी है। हालांकि विशेषज्ञ दोनों नदियों की ठीक-ठीक लंबाई से सहमत नहीं। हां, इतना निश्चित है कि पानी की अधिकता से यह दुनिया की सबसे लंबी नदी है। अटलांटिक महासागर में गिरने से पहले अमेजन और इसकी सहायक नदियां पेरू, बोल्विया, वेनेजुएला, कोलंबिया, इक्वाडोर और ब्राजील से गुजरती हैं। अमेजन नदी में मछलियों की 3,००० से ज्यादा प्रजातियां पायी जाती हैं।
यांग्त्सीक्यांग
यह चीन की सबसे लंबी और दुनिया की तीसरी सबसे लंबी नदी है। यह करीब 6,3०० किलोमीटर लंबी है। विश्ोषज्ञों के अनुसार इसका उद्गम तिब्बती पठार के पूर्वी हिस्से में स्थित ग्लेशियर हैं। यांग्तजी नदी पर बनाया गया बांध 'थ्री गोज्रेज डैम’ दुनिया का सबसे बड़ा हाइड्रो-इलेक्ट्रिक पावर स्टेशन है। यह नदी दुनिया का सबसे व्यस्त जलमार्ग भी मानी जाती है।

डैन्यूब

यह यूरोप की सबसे महत्वपूर्ण नदियों में से एक है। यह इस महाद्बीप की वोल्गा नदी के बाद दूसरी सबसे लंबी नदी है। यह नदी लंबे समय तक रोमन साम्राज्य की प्रहरी रही। आज यह 1० यूरोपीय देशों की सीमा बनाती है। यह जर्मनी के ब्लैक फॉरेस्ट से निकलती है और 2,85० किलोमीटर के सफर के बाद ब्लैक सी में मिलती है।

गंगा

गंगा हमारे देश की सबसे पवित्र नदी मानी जाती है। पुराणों में इस नदी को देवी का स्थान दिया गया है, भारत में इसकी पूजा की जाती है। गंगा का उद्गम स्थल पश्चिमी हिमालय माने जाते हैं। यह 2,51० किलोमीटर लंबी है। यह नदी पश्चिम बंगाल के सुंदरवन डेल्टा में गिरती है। इसके हुगली नदी के नाम से भी जाना जाता है। गंगा का प्राचीन काल से ही धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व रहा है। गंगा के महत्व को देखते ही इसे 'राष्ट्रीय नदी’ घोषित किया गया है।


मेकांग

यह दुनिया की 12वीं सबसे लंबी नदी है जिसकी लंबाई 435० किलोमीटर है। तिब्बत के पठार से निकली यह नदी चीन के युयान प्रांत से होती हुई म्यांमार, लाओस, कंबोडिया और थाईलैंड से होकर गुजरती है। विश्ोषज्ञों के मुताबिक इस नदी में सबसे खतरनाक और जहरीले सांप पाए जाते है।

जांबेजी

अफ्रीका में यह चौथी सबसे लंबी नदी है जिसकी लंबाई 3,45० किलोमीटर है. यह नदी उत्तर-पश्चिम जांबिया के वेटलैंड से निकलती है और अंगोला से होती हुई नामीबिया, बोत्सवाना, जांबिया, जिंबांब्वे और मोजांबिक होती हुई हिद महासागर में मिलती है। माना जाता है कि साल में दो बार इस नदी के पानी का स्वाद बदलता है। जांबेजी नदी की शानदार विशेषता विक्टोरिया प्रपात है।

वोल्गा

यह यूरोप की सबसे लंबी और रूस की सबसे महत्वपूर्ण नदियों में से एक है। रूस के सबसे बड़े 2० शहरों में से 11 वोल्गा के ड्रेनेज बेसिन में स्थित हैं, जिनमें राजधानी मास्को भी शामिल है। यह मात्र 225 मीटर की ऊंचाई पर वाल्दे हिल्स से निकलती है और 3,645 किलोमीटर लंबा सफर तय करते हुए कैस्पियन सागर में गिरती है।

मिसीसिपी

करीब 3,73० किलोमीटर लंबी मिसीसिपी अमेरिका और उत्तरी अमेरिका की सबसे लंबी नदी है। यह इतास्का नामक झील से निकलती है और मैक्सिको की खाड़ी में खत्म होती है। इसके जल की धारा काफी तेज और ठंडी होती है।

सेपिक

यह न्यू गिनी आइसलैंड की सबसे लंबी नदी है। इसका उद्गम पापुआ न्यू गिनी के पहाड़ों में है। अन्य बड़ी नदियों की तरह इसका कोई डेल्टा नहीं है और यह सीधे समुद्र की तरफ बहती है। इस नदी की कुल लंबाई 1,128 किलोमीटर है।



 

Tuesday, 25 February 2014

समयचक्र

वक्त का पहिया

रुक जाओ कहां जा रहे हो तुम

तुम्हें फिक्र नहीं पीछे चल रहे

इस विषैले वातावरण की

जिसमें तुम घुलने वाले हो

बात को समझो

समझ गए तो वा..वा

नहीं तो जा..जा

यही होगा बाद में


जहां तुम जा रहे हो शायद वहां

तुम्हें वो न मिल पाए

जिसे तुमने छोड़ दिया था

गवां दिया था

बर्बाद कर दिया था

उस मौजपन में

जब वह तुम्हारे पास था


अब वह कहां मिलने वाला

क्योंकि वह तो कब का गुजर चुका है

वह वापस नहीं लौटता

यही तो सब कहते हैं

उसके जाने के बाद

बिदा होने के बाद


इसलिए तुम वापस लौट आओ

मान भी जाओ

कम से कम

अब जो तुम्हारे पास है

उसे तो मत गंवाओ

पछतावा होगा

माथा पीटोगे

जब पता चलेगा कि

वो तो समय था

और समय कभी वापस नहीं लौटता.......!!


 

 

मुल्क