Friday, 14 March 2014

किरायेदार या मालिक

किराएदार रख रहे हैं या पंगेबाज

मेट्रों शहरों में निरंतर परिवार छोटे होेते जा रहे हैं जबकि घर बड़े। इन में कोई रहने वाला तक नहीं होता। ऐसी स्थित में घर को किराए पर दे दिया जाता है। घर किराए पर देना जहां किराएदार के लिए आशियाने की तलाश पूरी करता है तो वहीं मकान मालिक के लिए यह कमाई का जरिया भी बनता है। हालांकि घर किराए पर देना तो सरल होता है लेकिन कभी-कभी किराएदार से इसे खाली कराना बेहद मुश्किल। इसलिए घर किराए पर देने से पहले सारे जरूरी पहलुओं पर गौर कर लेना चाहिए।

बैकग्राउंड वेरिफिकेशन

घर रेंट पर देने से पहले किराएदार का बैकग्राउंड व उससे जुड़ी सारी जानकारी व डाक्यूमेंट्स की जांच कर लेनी चाहिए। इसके तहत आप किराएदार से रेफरेंस सिर्टफिकेट भी मांग सकते हैं। साथ पर्मानेंट एड्रेस व कांटेक्ट नंबर लेना भी जरूरी है। क्योंकि यह वक्त आने पर आपके बहुत काम आ सकता है। साथ ही इस कड़ी में किराएदार द्बारा उपलब्ध कराए गए डॉक्युमेंट्स को अच्छी तरह से चेक कर लें।
इस सबके बावजूद इस कड़ी का एक और महत्वपूर्ण बिंदु है, जिसके अनुसार पुलिस से भी वेरिफिकेशन करवाना जरूरी है। ध्यान रहे किरायेदार से मकान खाली करवाने में लोकल पुलिस आपका सहयोग तभी कर सकती है जब वह किरायेदार किसी संदिग्ध या गैरकानूनी गतिविधि से जुड़ा हो या कोर्ट के आदेश होने पर ही।

डाक्यूमेंटेशन भी जरूरी

अगर आप कुछ महीनों के लिए प्रॉपर्टी किराये पर दे रहे हैं तो पुलिस वेरिफिकेशन फॉर्म के साथ किराएदार की फोटो, उसके डॉक्यूमेंट्स की कॉपी जैसे पैन कार्ड, लीज अग्रीमेंट और एड्रेस प्रूफ नजदीकी पुलिस स्टेशन में जमा करवाने जरूरी होते हैं। साथ ही 11 महीनों से अधिक के लिए प्रॉपर्टी किराए पर देने पर आपको लीज अग्रीमेंट देना पड़ता है। इस दस्तावेज में एग्रीमेंट की अवधि, खाली न करने पर किराएदार पर लगने वाला जुर्माना आदि जानकारियां दी जाती हैं।

नियम-कानून

मकान मालिक और किराएदार के बीच के संबंध किराएदारी कानूनों के तहत होते हैं। इन कानूनों में प्रावधान हैं कि मकान मालिक कब-कब मकान खाली करवा सकता है। सामान्य रूप से किराएदार शर्तों का पालन करता है। मकान मालिक को स्वयं अथवा अपने परिवार के किसी सदस्य के लिए मकान की जरूरत नहीं है तो वह किराएदार से मकान खाली नहीं करवा सकता है। लेकिन ऐसा कोई कानून नहीं है कि किराएदार से मकान मालिक मकान खाली न करवा सकता हो।

समय पर किराया अदा न करना

अवधि पूरी होने के साथ-साथ किराया न देने या अवैध गतिविधयों में लि’ होने के आधार पर किराएदार को मकान छोड़ने के लिए कह सकते हैं। आपकी प्रॉपर्टी के किसी हिस्से में बिना आपकी मर्जी के बदलाव करने पर भी किरायेदार को घर छोड़ने के लिए कहा जा सकता है। अगर किरायेदार ज्यादा ही अड़ियल हो तो उसके सभी डॉक्यूमेंट्स लेकर इन मामलों के निपटारे के लिए अथॉरिटी की शरण में जा सकते हैं।

कोर्ट की भूमिका

अगर कोई भी पक्ष स्टेट अथॉरिटी के फैसले से असंतुष्ट हो तो वह सिविल कोर्ट की शरण में जा सकता है। कितने समय में फैसला हो जाएगा, इन मामलों में यह कहना बहुत मुश्किल है। सिविल कोर्ट से भी निराशा हाथ लगने पर हाई कोर्ट में अपील की जा सकती है। इतना जरूर ख्याल रखें कि बल के प्रयोग से मकान खाली करवाने की कोशिश आपके ही केस को कमजोर कर सकती है क्योंकि यह गैर-कानूनी है। इसलिए ऐसा कोई कदम न उठाएं।
एक याचिका की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कि यदि मकान मालिक को मकान की आवश्यकता है तो किराएदार को उसे खाली करना ही पड़ेगा। किराएदार यह तय नहीं कर सकता कि जो हिस्सा मकान मालिक के पास है वह उसके रहने के लिए पर्याप्त है।

मकान मालिक निम्न कारणों से मकान खाली कराने का अधिकारी होता है-


  • -यदि किराएदार ने पिछले चार से छह माह से किराया अदा नहीं किया हो।
  • - किराएदार ने जानबूझ कर मकान को नुकसान पहुंचाया हो।
  • - किराएदार ने मकान मालिक की लिखित स्वीकृति के बिना मकान या उस के किसी भाग का कब्जा किसी अन्य व्यक्ति को सौंप दिया हो।
  • - यदि किराएदार मकान मालिक के हक से इनकार कर दिया हो।
  • - किराएदार मकान का उपयोग किराए पर लिए गए उद्देश्य के अलावा अन्य कार्य के लिए कर रहा हो।
  • - यदि किराएदार को मकान किराए पर किसी नियोजन के कारण दिया गया हो और किरायेदार का वह नियोजन समाप्त हो गया हो।
  • - किराएदार ने जिस प्रयोजन के लिए मकान किराये पर लिया हो पिछले छह माह से उस प्रयोजन के लिए काम में न ले रहा हो।






पब्लिश होने के बाद..............

प्रतिष्ठित अखबार मे प्रकाशित

बदलती आकृतियां


कोहरे में आकृतियां बन रही हैं
छिप रही हैं बदमाशियां
कब तक छिपेंगी
कहना मुश्किल
शायद तब तक
जब तक लहू गर्म न हो

सर्द सम्मोहन शुरु हो चुका है
किसी जादूगर के
बोले गए मंत्र के समान
जिसके बाद सब बदल जाता है
कुछ वैसा नहीं रहता
जैसा कुछ देर
पहले छोड़ा गया था

शोर में सन्नाटा छा रहा है
ठीक वैसे ही
जैसे मृत्यु के बाद सिसकियों में
या जैसे शिशु के
जन्म पाने की बाद की खुशी में
अब सर्द का दर्द भी बढ़ चला है
चिरकाल तक
हड्डियों में बसने के लिए.....
 
...............................
 

उसके शब्दों का तिरस्कार


उस दिन उसने उससे
कहा था
कुछ बेशकीमती शब्दों के साथ
फिर भी नहीं समझा वह
सोचता रहा, टालता रहा
वक्त के साथ
वो बेईमान, नासमझ
उसकी बातें

सुईयां घूमती रहीं
बसंत बीतते रहे
फिर वो भी दिन आया जब
नासमझ समझदार बनने
की फिराक में
चल पड़ा रेतीले आसमान की ओर
उसके कहे हुए बेशकीमती
शब्दों को ढूंढने

देर तो बहुत हो चुकी थी
फिर भी कुछ सुईयां अभी भी
कांपती हथेलियों
पर कटाक-कटाक कर रहीं थीं
लेकिन शब्द तो विलीन हो चुके थे
उस नील गगन में
जहां वो आजकल
अपने शब्दों के साथ विश्राम कर रही है ।।

Wednesday, 12 March 2014

उस यात्रा का रहस्य....

नानी और उनका घर


वो अकेला ऐसा घर होता था, जहां कुछ भी उल्टा करो सब सीधा हो जाता था। उस घर को ही तो नानी का घर कहा जाता है। कई साल गुजर गए वहां गए हुए। बचपन में बिताए गए उन लम्हों की बारिश आज भी मन के आंगन को बिना इजाजत लिए भिगोकर चली जाती है।
 
कानपुर शहर से तकरीबन चालीस किलोमीटर दूर नेशनल हाइवे के साथ सटा हुआ बसा है मेरा ननिहाल। वहां एक कस्बे के अनुसार सारी मूलभूत जरूरते पूरी होने के सारे संसाधन मौजूद हैं। और मेरे लिए तो शायद हर वो जरूरत जो कहीं और पूरी नहीं हो सकती यहां पूरी हो जाती है।
काफी अरसा गुजर चुका है, जब मैं आखिरी बार वहां गया था। उसदिन सन्नाटा शायद जून के धड़धड़ाते हवारे पर भारी पड़ रहा था। बस भी ऐसी चाल में थी जैसे उसकी यह आखिरी यात्रा हो। बस पर व यात्रियों पर गर्मी और लू के थपेड़ों का असर साफ दिख रहा था।
 
अम्मी का चेहरा इससे पहले मैनें कभी ऐसा नहीं देखा था। पहली बार ऐसा था जब नानी के यहां जाते वक्त जैसे वो मुझे जबरदस्ती लाद के ले जा रहीं थीं। हालांकि मैं तो उन पर बोझ नहीं था मैं तो पापा की गोद को सिंहासन समझ अपने राज्य का स्वतंत्र संचालन कर रहा था। जहां सब मेरे हुक्म का पालन करते थे। तभी बस में शोरगुल शुरु हो गया। मेरा सिंहासन हिल चुका था। पापा और अन्य यात्री बस से उतर कर बाहर खड़े थे।
 
दरअसल एक बिल्ली बस के रास्ते आ अपने जीवन की लीला समा’ कर चुकी थी। या शायद बस ने उसको अपनी चपेट में लिया था। सही-सही कहना थोड़ा मुश्किल है। कुछ देर बाद बस अपने रास्ते पर फिर दौड़ चुकी थी साथ में यात्रियों की तमाम अनहोनी से जुड़ी घटनाओं का दौर लेकर।
इन सब चीजों का असर अम्मी पर बिल्कुल भी नहीं समझ आ रहा था। उनके चेहरे पर अजीब सी बेचैनी और शिकन की रेखाओं के सिवा मुझे कुछ नहीं दिख रहा था। आज मुझसे ज्यादा जल्दी शायद उन्हें नानी के घर पहुंचने की थी। लेकिन ऐसा क्यूं? इस पर मेरा मासूम मन नहीं जा पा रहा था।
 
बस धीरे-धीरे अपनी गति से गतिमान हो रही थी। अब बस का माहौल बेहद शांत लेकिन तनावपूर्ण लग रहा था। आमतौर पर यात्रा के दौरान मैं सो जाया करता था। लेकिन उस दिन आंखों ने नींद पर विजय प्रा’ कर ली थी। शायद अम्मी-पापा के तनाव का असर मेरे ऊपर भी हावी हो चुका था।
बस अब अपने थोभड़े को खोल चुकी थी, जिसकी पों-पों की आवाज सुन दूसरे वाहन रास्ता दे रहे थे। बस की पों-पों तेज हो गई थी वहीं उसकी रफ्तार धीमी। दरअसल भीड़-भाड़ और उस कस्बे की सीमा की शुरुआत हो चुकी थी। जहां मेरे नानी का यानी मेरा सबसे प्यारा घर है।
 
अम्मी अब और अधीर हो रहीं थीं। बस ने अपने पैर स्टैंड पर जमा दिए थे और यात्रियों के पैर खुल चुके थे रास्तों पर दौड़ने के लिए। आज अम्मी इतनी हड़बड़ी में क्यूं हैं? झुंझलाते हुए मैने पापा से शिकायती लहजे में पूछा था। लेकिन पापा के कानों में शायद मेरी आवाज नहीं पहुंच पा रही थी। वो सिर्फ रिक्श्ो को आवाज देने में व्यस्त थे।
 
करीब पांच मिनट बाद हम नानी के दरवाजे पर पहुंच चुके थे। वहां लोगों का जमावड़ा था। माहौल बिल्कुल शांत और बेचैन करने वाला था। ज्यादातर मुझे सफेद लिबाजों में लिपटे लोग ही नजर आ रहे थे। ऐसा सन्नाटा मैनें आज से पहले कभी नहीं महसूस किया। तभी भीड़ से चीरती, कांपती सिसकियां मेरे कानों में किसी अजीज के इस दुनिया से रुखसत होने का संदेशा पहुंचा रहीं थीं। अब अम्मी की अधीरता, चेहरे की शिकन, मन की बेचैनी, पापा की जल्दबाजी और परेशानी का राज मेरी समझ में आ चुका था।

 

Tuesday, 11 March 2014

प्रोपर्टी संसार

घर पाने के लिए गलतियों से बचना जरूरी


एक खूबसूरत घर खरीदने का सपना लगभग हर किसी का होता है। छोटे पूंजी वाले लोगों के लिए घर खरीदना थोड़ा मश्किल होता है। अगर आप घर खरीदने के लिए होम लोन के लिए एप्लाई कर रहे हैं, तो जरूरी है कि उसको पास कराने के लिए उचित प्रक्रिया का पालन किया जाए। वैसे भी कम पूंजी वाले लोगों के लिए घर खरीदने में होम लोन बेहद मददगार साबित होते हैं। लेकिन कुछ गलतियों की वजह से कई लोग इन्हें हासिल करने में नाकामयाब रहते हैं। जानते हैं ऐसी ही कुछ गलतियों के बारे में।

लोन प्रोवाइडर के बारे में कम जानकारी

ज्यादातर केस में देखा जाता है कि लोन लेना वाले व्यक्ति को लोन प्रोवाइडर एजेंसीज या संस्थान के बारे में पूरी और सही जानकारी नहीं होती। वे सिर्फ एडवर्टीजमेंट्स में किए गए लुभावने वायदों व आकर्षक ब्याज दरों के प्रस्ताव या अपने दोस्तों व फैमिली वालों की बातों में आकर फैसला कर लेते हैं। जो बाद में उनके लिए घातक साबित होता है। इसलिए यह जरूरी हो जाता है कि आप पूरी तरह से रिसर्च करें। रिसर्च के लिए आप इंटरनेट की हेल्प से ले सकते हैं। यहां पर आपको इंट्रेस्ट रेट, होम लोन ऑफर्स के बारे में पूरी इंफार्मेशन मिल जाएगी।

एग्रीमेंट में लापरवाही करना

घर खरीदने की जल्दबाजी में हम अकसर प्रापर्टी या लोन से संबधित दस्तावेजों पर गौर नहीं करते जो बाद में हमारे लिए परेशानी का सबब बनती हैं। हम सब को बचपन से बताया जाता है कि कहीं भी साइन करने से पहले वहां लिखे रूल्स एंड रेगुलेशंस को इत्मीनान से क्रॉस चेक कर लेना चाहिए। एग्रीमेंट के डाक्यूमेंट्स में कोई ऐसा नियम या शर्त हो सकती है जो आपको बिल्कुल मंजूर न हो। इसे पढ़ कर क्लियर हो जाएगा कि आप किस परिस्थिति में पैर रखने जा रहे हैं। यदि आपको किसी शर्त पर आपत्ति है तो उसके बारे में बैंक के साथ बात की जा सकती है। और उसे सुलझाया जा सकता है।

कंप्लीट इंफार्मेशन का न होना

अकसर यह बात सामने आती है कि बायर को घर खरीदने से रिलेटेड ज्यादा जानकारी नहीं होती है। जो उनके और घर के बीच रोढ़ा साबित होती है। इसलिए घर खरीदने की प्रक्रिया शुरू करने से पहले आपको अपने लेवल पर सही तरीके से खोज करनी चाहिए। किसी और के प्रदान की गई सूचना पर भरोसा करना आपके लिए नुकसानदायक साबित होता है। इसलिए यह जरूरी हो जाता है कि अगर आप अपनी मनपसंद प्रापर्टी पाना चाहते हैं तो रिसर्च प्रक्रिया बेहद जरूरी है। इस प्रक्रिया के तहत सबसे पहले उन प्रोजेक्ट्स या एरियाज को प्वाइंट आउट करें जो आपके लिए सही और कंफर्टेबल हों।
होम लोन की बात हो तो ध्यान रखें कि आप होम लोन के बारे में कंप्लीट इंफार्मेशन हासिल करें। जिस तरह से आप बाजार में खरीदारी के वक्त विभिन्न दुकानों पर घूम कर अपनी पसंद तथा जरूरत की चीज की तलाश करते हैं ठीक उसी तरह से आपको उपयुक्त होम लोन की खरीदारी करनी चाहिए।

मंथली किस्तों का क्लियरेंस

कई बार लोग लोन लेने के वक्त मंथली किस्तों का अमाउंट जल्दी भरने के लिए ज्यादा करवा लेते हैं। क्योंकि उन्हें लगता है कि वे अपनी मंथली इनकम का 4० से 45 पर्सेंट मंथली किस्त के रूप में अदा कर सकते हैं। हालांकि वे उन खर्चों का ध्यान रखना भूल जाते हैं जो अचानक करने पड़ सकते हैं। इस तरह के गलत आकलन की वजह से आप अपनी क्षमता से अधिक लोन ले लेते हैं। जो बाद में आप पर बोझ बन जाता है। इसलिए यह बेहर जरूरी पहलू है कि आप अपनी मासिक किस्तों के अमाउंट पर ध्यान दें। अगर ऐसा नहीं होता है तो खूबसूरत घर के मालिक बनने का ख्वाब आर्थिक समस्या की वजह से बुरा साबित हो सकता है।

अपनी क्रैडिट रिपोर्ट प्राप्त नहीं करना

बैंक या हाऊसिग फाइनांस कार्पोरेशन के साथ होम लोन संबंधी बातचीत करने से पहले आपको अपनी क्रैडिट रिपोर्ट को किसी तरह की गलती या गड़बड़ के लिए जरूर जांच लेना चाहिए। यदि आपको कोई गलती या गड़बड़ दिखाई दे तो उसे तुरंत चुनौती दें क्योंकि इससे आपका क्रैडिट स्कोर प्रभावित होता है। नकारात्मक क्रैडिट रिपोर्ट आपके लोन लेने की क्षमता पर बेहद बुरा प्रभाव डालती है। अच्छी क्रैडिट रिपोर्ट से आप अधिक लोन लेने के योग्य हो सकते हैं।

एप्लीकेशन में गलत डाटा देना

ज्यादातर होम लोने के एप्लाई करने के लिए हम पहली बार ही जाते हैं। जिस वजह से हमें इस प्रासेस के बारे में सही जानकारी नहीं होती। लोन एप्लीकेशन भरते समय आमतौर पर हम एप्लीकेशन में पूछे गए सवाल के बारे में जानकारी न होने पर उसे खाली छोड़ देते हैं या अनुमान के अनुसार उसमें डाटा फिल कर देते हैं। यह करना हमारे लिए घातक साबित होता है। एप्लीकेशन भरते समय की गई थोड़ी सी भी चूक आपके होम लोन पाने के ख्वाब को मटियामेट कर सकती है। इससे बचने के लिए या तो किसी से परामर्श लें या जानकारी न होने की स्थित में स्वयं बैक या लोन प्रोवाइडर एजेंट या संस्थान जाकर पूरी प्रक्रिया को समझकर ही एप्लीकेशन फार्म को फिलअप करें। ध्यान रहे कि अगर आपके क्रेडिट कार्ड पर अमाउंट बकाया है या पहले से आपने कोई लोन ले रखा है तो यह आपकी होम लोन क्षमता को प्रभावित करेगा। इसलिए एप्लीकेशन में सही डाटा प्रोवाइड करना जरूरी है।

इंश्योरेंस न लेना

इंश्योरेंस किसी भी अनहोनी घटना के वक्त परिवार को बचाने के लिए बेहद मददगार साबित होते हैं। ऐसी किसी भी सिचुएशन से बचने के लिए फैमिली को सिक्योरिटी प्रोवाइड करने के लिए होम लोन का इंश्योरेंस करवाना आवश्यक है। लोन लेने वाले की मृत्यु की स्थिति में लोन की बाकी सारी राशि को बीमा कंपनी अदा कर देती है। इसी प्रकार किसी क्रिटिकल बीमारी पॉलिसी के तहत लोन लेने वाले की आय में किसी गंभीर रोग की वजह से कमी आने पर भी बीमा कं पनी एक तय समय तक किस्तों की अदाएगी करती है।


 

Saturday, 8 March 2014

चालबाज दुनिया में 'मास्टरनी’

'महा-मास्टरनी'

उसे दुनियादारी नहीं पता थी

मौत का मर्सिया पढ़ना उसे नहीं आता था
लेकिन वक्त ने उसको
सिखा दिया सबकुछ
वह भी जो उसे आता था
और वह भी जिससे उसका साबका न था
उन दिनों उस पर वो सब गुजरा
जो उसे कभी कुबूल न था

ये जालिम वक्त
शिला के भी टुकड़े कर देता है
और पानी के वजूद को भी मटमैला
लेकिन अब
वक्त की धार में पैनापन
शायद ज्यादा था
या था ही नहीं
यहां अब सबकुछ उल्टा चल रहा था
दुनिया की नजरों में
लेकिन ये तब उल्टा नहीं था
जब यह उसके साथ घटित हो रहा था

अब मजबूती ने मुट्ठी को
कसकर भींच रखा था
क्योंकि वक्त तो उल्टे का था ना
अब सबके साथ उल्टा होगा सिर्फ उसके सिवा
क्योंकि
वक्त टुकड़ों का गठजोड़ कर चुका था
अब तो वह
चुड़ैल हो चुकी थी
अब हर वो शब्द उसके लिए था
जिन्हें प्रबुद्ध समाज के लोग
अपनी जुबां पर कम
लेकिन दिमाग में हमेशा रखते हैं

मेरी नजरों में तो वह महा-मास्टरनी थी
क्योंकि उसने उन सबको पछाड़ा था
जो खुद को
मालिक समझ बैठे थे
दुनियाभर की 'नारी जाति’ का ।।


 

Wednesday, 5 March 2014

दो कवितायें.....

शब्द सागर


शब्दों के सागर में नाव डाल रखी है
दुम दबाए बैठना
सिखाया गया नहीं कभी
अब हाथ पैर तो मारने ही हैं
क्योंकि रुकना इस समंदर में
मौत को आमंत्रण होगा

अब चीर कर नीर को
आगे बढ़ना है
हों झंझावात चाहे जितने
इसीलिए शब्दों के शिखर
की तलाश जारी है
इस जहां में
सिरमौर बनने की खातिर
................................................ 

यात्रा

दुनिया को समझने की फिराक में
निकला हूं
पहुंचूंगा कहां कुछ पता नहीं
रास्ता तो शायद मिल भी जाए
लेकिन क्या मंजिल सिमटेगी हथेलियों में

कोशिशों के पुलिंदे साथ हैं
क्या उस पुलिंदे में चाभी छुपी है
उस खास दरवाजे की
जिसे सब खोलने में लगे हैं
पक्का यकीं है मुझे
तुम सब भी
मिलोगे  
उसी खास दरवाजे के पास



Sunday, 2 March 2014

चलते चलते...(लघु संस्मरण)


'बरेली’ यात्रा और 'मैं’

यात्रा की शुरूआत हमेशा कौतूहल, उत्सुकता और रोमांच के साथ होती है। लेकिन इसका अंत थकान, नीरसता और उदासी के साथ होता है। इस मसले पर मेरे साथ कुछ उलटा था। 

कल ही यूपी के खूबसूरत और दिलफेंक शहर 'बरेली' की यात्रा पर जाना हुआ।
कभी-कभी आपको पता नहीं होता कि अगले पल आपके साथ क्या होने वाला है। और जब पता ही नहीं होगा तो न कोई प्लानिंग होगी न ही कोई आईडिया।
ठीक ऐसा ही मेरे साथ भी हुआ। मसला कुछ यूं था कि बरेली जाने का फरमान अचानक मेरे पास आ पहुंचा। अब फरमान था सो जाना भी जरूरी। लेकिन रेल रिजर्वेशन/टिकट का कुèछ अता-पता नहीं, जैसे-तैसे नोएडा स्थित पीजी से निकलकर मेट्रो के जरिए दिल्ली रेलवे स्टेशन तक पहुंचा। पहुचने पर पता चला कि ट्रेन प्लेटफार्म पर रेंग चुकी है।
अब मेरा क्या था...जाना कैंसिल...अरे नहीं। ...मैनें ट्रैक पर दौड़ लगा दी, दौड़ा ही था कि टीटी महाशय ने टांग अड़ा दी...अरे वो गिराने वाली टांग नहीं, टिकिट चेक करने वाली टांग। लेकिन मैं तो मैं था, कहां रुकने वाला। लेकिन अफसोस कि रुकना पड़ा, टीटी की खातिर... नहीं...दरअसल आगे रास्ता ही बंद था।
अब टीटी मेरे सामने और मैं उसके सामने। मामला गंभीर हो रहा था। लेकिन इतना गंभीर हो जाएगा पता नहीं था। टीटी के बिहैवियर से मैं स्तब्ध था।
कुछ ही लम्हों बाद ट्रैक पर मेरे दोनों पैर एक-दूसरे को पछाड़ने की कश्मकश में लगे हुए थे। अगले पल कोच का हैंडल मेरे हाथ में था और शरीर कोच में....
.... लेकिन मन उस टीटी के पास ही छूट चुका था...।

 

मुल्क