Sunday, 6 April 2014

कंकालों का घर

कंकालों का घर रूपकुंड झील

आप एडवेंचर ट्रैकिग के शौकीन है तो रूपकुंड झील आपके लिए एक बेहतरीन जगह है। रूपकुंड झील हिमालय के ग्लेशियरों के गर्मियों में पिघलने से उत्तराखंड के पहाड़ों में बनने वाली छोटी सी झील है।
यह झील 5०29 मीटर की ऊंचाई पर स्तिथ है, जिसके चारों और ऊंचे-ऊंचे बर्फ के ग्लेशियर हैं। यहां तक पहंुचने का रास्ता बेहद दुर्गम है इसलिए यह जगह एडवेंचर ट्रैकिग करने वालों की पसंदीदा है। यह झील यहां पर मिलने वाले नरकंकालों के कारण काफी चर्चित है। यहां पर गर्मियों में बर्फ पिघलने के साथ ही कहीं पर भी नरकंकाल दिखाई देना आम बात है। यहां तक कि झील के अंदर देखने पर भी तलहटी में भी नरकंकाल पड़े दिखाई दे जाते हैं। यहां पर सबसे पहला नरकंकाल 1942 में रेंजर एच.के. मड़वाल द्बारा खोजा गया था। तब से अब तक यहां पर सैकड़ों नरकंकाल मिल चुके हैं। जिसमंे हर उम्र व लिग के कंकाल शामिल हैं। यहां पर नेशनल जियोग्राफिक टीम द्बारा भी एक अभियान चलाया गया था जिसमे उन्हें 3० से ज्यादा नरकंकाल मिले थे।
इस जगह पर इतने सारे नरकंकाल आए कैसे? इसके बारे में अलग-अलग कहानियां प्रचलित हैं। 1942 में हुए एक रिसर्च से हड्डियों के इस राज पर थोड़ी रोशनी पड़ सकती है। रिसर्च के अनुसार ट्रैकर्स का एक ग्रुप यहां हुई ओलावृष्टि में फंस गया जिसमें सभी की अचानक और दर्दनाक मौत हो गई। हड्डियों के एक्सरे और अन्य टेस्ट में पाया गया कि हड्डियों में दरारें पड़ी हुई थीं जिससे पता चलता है कि कम से कम क्रिकेट की बॉल की साइज के बराबर ओले रहे होंगे। वहां कम से कम 35 किमी. तक कोई गांव नहीं था और सिर छुपाने की कोई जगह भी नहीं थी। आंकड़ों के आधार पर माना जा सकता है कि यह घटना 85० ईसवीं के आस पास की रही होगी।
एक दूसरी किंवदंती के मुताबिक तिब्बत में 1841 में हुए युद्ध के दौरान सैनिकों का एक समूह इस मुश्किल रास्ते से गुजर रहा था। लेकिन वे रास्ता भटक गए और खो गए और कभी मिले नहीं। हालांकि यह एक फिल्मी प्लॉट जैसा लगता है पर यहां मिलने वाली हड्डियों के बारे में यह कथा भी खूब प्रचलित है।
अगर स्थानीय लोगों के मानंे तो उनके अनुसार एक बार राजा 'जसधावल’ नंदा देवी की तीर्थ यात्रा पर निकला। उसको संतान की प्राप्ति होने वाली थी इसलिए वह देवी के दर्शन करना चाहता था। स्थानीय पंडितों ने राजा को इतने भव्य समारोह के साथ देवी दर्शन जाने को मना किया। जैसा कि तय था इस तरह के जोर-शोर और दिखावे वाले समारोह से देवी नाराज हो गईं और सबको मौत के घाट उतार दिया। राजा, उसकी रानी और आने वाली संतान को सभी के साथ खत्म कर दिया गया। मिले अवशेषों में कुछ चूड़ियां और अन्य गहने मिले जिससे पता चलता है कि समूह में महिलाएं भी मौजूद थीं। तो अगर आप सुपरनेचुरल और देवी-देवताओं में विश्वास करते हैं तो इस कहानी को मान सकते हैं। अपने साथ किसी स्थानीय व्यक्ति को ले जाइए और रात के समय यह कहानी उनसे सुनिए। आपके रोंगटे जरूर खड़े हो जाएंगे।


Friday, 4 April 2014

बहुत हो गई बेपरवाही


लाइफ का फंडा तो बदलना पड़ेगा बॉस


एक बिदास और स्मार्ट युवा लाइफ का यही फंडा है। खाओ, पियो और मौज करो। लेकिन जब इसी उम्र में चर्बी चढ़ने लगती है। सेक्सुअल डिसीज के आँकड़े बढ़ने लगते हैं और जब टेंशन के मारे युवा नशे के शिकार होने लगते हैं, तो फिक्र होना लाजिमी है। सो, बी केयरफुल, हेल्थ इज वेल्थ या यूं कहें कि जियो जी भर के मगर सलीके से।
ऐसा नहीं है कि यह उम्र लापरवाह होती है। अगर ऐसा होता तो सिक्स पैक एब और जीरो फिगर की चाह में युवा जिम में मशक्कत नहीं कर रहा होता। सभी युवाओं की इच्छा होती है वह सुंदर दिखें, सेहतमंद रहें लेकिन साथ ही उत्साह, जोश और मस्ती भी तो इसी उम्र का असर है। वह कहां-कहां से बचें और कितना बचें? उम्र की सारी खुशियां बटोरते हुए भी हेल्थ और ब्यूटी पाई जा सकती है। बस इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

 

लाइफ को समझें

युवाओं को पेरेंटस का रोकना-टोकना बुरा लगता है। लेकिन थोड़ा सा समझें कि वे इस उम्र से गुजर चुके हैं और उन्हें हमसे ज्यादा दुनियादारी का तजुर्बा है। ठीक है, उनका जमाना और था, हमारा जमाना और है। पर सेहत की बात तो हर वक्त उतनी ही सही और सटीक होती है, जितनी हमारे शरीर के लिए जरूरी है। हमें उनका कहा बुरा लगता है तो खुद सोचें कि क्या हम यूँ ही इस दुनिया से चले जाएँगे बिना अपने सपनों को साकार किए? नहीं ना? तो फिर सुबह जल्दी उठनाए मॉîनग वॉक पर जाना, जिम जाना या जंक फूड न खाना जैसी बातें हमें बुरी क्यों लगती हैं?
अगर हमें सपने पूरे करने हैं तो लंबे समय तक जीना होगा और जीने के लिए हेल्दी रहना होगा और हेल्दी रहने के लिए बस इन्हीं छोटी-छोटी बातों का पालन करना होगा। समझ गए ना ? तो जियो जी भर के मगर सही तरीके और सलीके से। अगर आपको पेरेंटस की रोक-टोक पसंद नहीं तो अपने नियम खुद बना लें आखिर सेहत भी तो आपकी है।

खुद करें चुनाव

यंगएज में उतावलापन, गुस्सा, तनाव, जोश सभी में नजर आता है। लेकिन हमें यह तय करना है कि हमें इतना गुस्सा क्यों आता है, किस बात पर आता है और किस पर सबसे ज्यादा आता है ? जब इनके जवाब खोज लें तो फिर यह तय करें कि आपके मन पर कौन राज करता है?
इसे कुछ यूँ समझें कि अगर कोई व्यक्ति, वस्तु या परिस्थिति आपको गुस्सा दिला रही है तो इसका मतलब है अपने मन पर आपने किसी और को डॉमेनेट करने की परमीशन दे रखी है। वो जब चाहे आपको गुस्सा दिला देता है। किस बात पर कितना गुस्सा करना है, यह कोई और नहीं, बल्कि आप खुद तय करें। अपने मन के राजा आप खुद बनें। इससे कम से कम दस बीमारियों से आप दूर रहेंगे। ऐसा मेडिकल साइंस कहता है।

टाइम-टेबल फिक्स करें

खाना, नहाना और सोना अगर जीवन में सिर्फ इन तीन बातों का भी आपने समय डिसाइड कर लिया तो समझो आपकी आधी लाइफ सुधर गई। समय पर खाने से शरीर का मेटॉबॉलिज्म सुधरता है। समय पर नहाने से शरीर का एक सही चक्र बनता है, जो सारे दिन फ्रेशनेश देता है। समय पर सोने से ब्रेन एक्टिव और हेल्दी रहता है। ब्रेन को पर्याप्त आराम मिलेगा तो आपकी डिसीजन मैकिग पॉवर स्ट्रांग होगी। अच्छी नींद, अच्छा खाना और अच्छे से नहाना ये बस सेहत के लिए ही नहीं सुंदरता के लिए भी जरूरी है।

गलतियों से बचें

इस दुनिया में ऐसा कोई नहीं जिससे गलतियाँ नहीं होतीं। लेकिन एक ही गलती को बार-बार करना गलत है और इससे भी ज्यादा गलत एक गलती को उम्र भर के लिए अपराध मान लेना है। हर समय पश्चाताप की आग में जलना सही नहीं है, जिस दिन आपको यह एहसास हो कि आप गलत थे, बस वही दिन आपका नया दिन है।
पुरानी सब बातों, गलतियों और भूलों के लिए खुद को माफ करो। कहते हैं, जो एक बार गिरता है, वह संभल कर चलना सीख जाता है। इसलिए सब बातों पर धूल-मिट्टी डालो और आगे बढ़ जाओ। दुनिया आपको आपकी गलतियों के लिए माफ करे ना करे। आप खुद को माफ करें और जरूरत पड़ने पर खुद को ही सजा भी दें। लेकिन खुद पर दया न करें न ही खुद पर अत्याचार करें। यह दोनों बातें ही हेल्थ को नुकसान पहुँचाती हैं।

Monday, 31 March 2014

कल्पवृक्ष....

आदिवासियों का कल्पवृक्ष

साल वृक्ष एक अर्ध-पर्णपाती और कई सालों तक जीवित रहने वाला वृक्ष है। इस वृक्ष की उपयोगिता प्रमुख रूप से इसकी लकड़ियां हैं, जो अपनी मजबूती के लिए प्रसिद्ध हैं। साल वृक्ष के बीज, जो वर्षा के आरंभ काल में पक जाते हैं। कहा जाता है कि पूर्व समय में अकाल पड़ने पर आदिवासी इसी वृक्ष के फल खाकर जीवित रहते थ्ो। विशेषकर अकाल के समय अनेक जगहों पर भोजन के रूप में काम आते थे। इसीलिए आदिवासियों के लिए यह वृक्ष किसी 'कल्प वृक्ष’ से कम नहीं माना जाता। यूं तो इसका फल ही इतना मीठा होता है कि चीनी खाने के समान स्वाद मालूम होता है वहीं इसकी टहनी से निकलने वाले रस से प्यास भी बुझाने के काम आता है।
यह वृक्ष भारत के कई हिस्सों में पाया जाता है। भारत, बर्मा तथा श्रीलंका में इसकी कुल मिलाकर नौ प्रजातियां हैं, जिनमें 'शोरिया रोबस्टा’ प्रमुख है। हिमालय की तलहटी से लेकर तीन से चार हजार फुट की ऊंचाई तक और उत्तर प्रदेश, बंगाल, बिहार तथा असम के जंगलों में यह प्रमुखता से उगता है। इस वृक्ष का विशेष और मुख्य लक्षण यह है कि ये अपने आपको विभिन्न प्राकृतिक मौसमों के अनुकूल बना लेता है।
 
भरी गर्मी में घने जंगलों में जब कंठ सूखने लगे और पीने का पानी न हो तो साल वृक्ष की टहनी से बूंद-बूंद टपकने वाले रस को दोने में एकत्र कर ग्रामीण अपनी प्यास बुझा लेते हैं। यह परंपरागत तरीका वर्षों से आदिवासी अपनाए हुए हैं। जंगलों में कोसा, सालबीज, धूप, तेंदूपत्ता आदि के संग्रह के लिए पहुंचने वाले ग्रामीण आमतौर पर पानी साथ लेकर नहीं जाते। ये लोग जंगल में पहुंचते ही साल वृक्ष के पत्ते का दोना तैयार करते हैं। इसके बाद पत्तों से लदी साल की टहनी काटकर उल्टा लटका देते हैं। कटी हुई टहनी का रस बूंद-बूंद टपकता है, जिससे दोना भर जाता है और ग्रामीण अपनी प्यास बुझा लेते हैं। इसीलिए साल वृक्ष के रस का उपयोग सदियों से किया जा रहा है। साल वृक्ष मानव के लिए बहुत ही लाभदायक है, इससे प्राप्त पत्ते, फल, लकड़ी, धूप, दातून यहां तक पानी भी संग्रहित किया जाता है।
 
साल वृक्षों की जड़ों के आस-पास कई तरह की सब्जियां पनप जाती हैं। जिसमें मशरूम प्रमुख है। साल वृक्ष के पत्तों से दोने में उतरा रस एक प्रकार से पूर्ण भोजन है, जिसे शर्करा भोजन कहा जा सकता है। इसमें प्रोटीन को छोड़ कर शेष सभी तत्व होते हैं। यह रस जमीन से वृक्ष द्बारा तत्व युक्त जल है। इसके सेवन से शरीर को तरलता मिलती है। कोई हानि नहीं होती है।
 

Sunday, 30 March 2014

पानी में शहर


समंदर की लहरों पर तैरता इक शहर

क्या आपने कभी ऐसे घर की कल्पना की है जो कि पानी के ऊपर हो? शायद नहीं, पर दुनिया में एक ऐसी बस्ती है जो कि पानी के ऊपर बसी है। इस बस्ती में रहने वाले लोगों की संख्या पूरी 7००० है। यह दुनिया की एक मात्र समुद्र पर तैरती हुई बस्ती है जो चाइना में स्थित। इस बस्ती में रहने वाले समुद्री मछुवार हैं जिन्हें टांका कहा जाता है।
 
चीन में कई सदियों पहले टांका कम्युनिटी के लोग वहां के शासकों के उत्पीड़न से इतने नाराज हुए कि उन्होंने समुद्र पर ही रहना तय किया था। करीब 7०० ईसवी से लेकर आज तक ये लोग न तो धरती पर रहने को तैयार हैं और न ही आधुनिक जीवन अपनाने को।
 
चीन के दक्षिण-पूर्व क्षेत्र में करीब 7००० मछुआरों के परिवार समंदर में तैरती अपने परंपरागत नावों के मकानों में रह रहे हैं। ये घर समुद्र पर तैर रहे हैं। इन विचित्र घरों की एक पूरी बस्ती है। समुद्री मछुआरों की यह बस्ती फुजियान राज्य के दक्षिण-पूर्व की निगडे सिटी के पास समुद्र में तैर रही है। टांका लोग नावों से बनाए घरों में रह रहे हैं इसलिए उन्हें 'जिप्सीज ऑफ द सी’ कहा जाता है। 

चीन में 7०० ईसवी में तांग राजवंश का शासन था। उस समय टांका जनजाति समूह के लोग युद्ध से बचने के लिए समुद्र में अपनी नावों में रहने लगे थे। तभी से इन्हें 'जिप्सीज ऑन द सी’ कहा जाने लगा और वह कभी-कभार ही जमीन पर आते हैं। इस जनजाति के लोगों का पूरा जीवन पानी के घरों और मछलियों के शिकार में ही बीत जाता है। ये जमीन पर जाने से बचने के लिए न केवल फ्लोटिग घर बल्कि बड़े-बड़े प्लेट फार्म भी लकड़ी से तैयार कर लिए हैं।
 
चीन में कम्युनिस्ट शासन की स्थापना होने तक ये लोग न तो किनारे पर आते थे और न ही समुद्री किनारों पर बसे लोगों के साथ वैवाहिक रिश्ते बनाते थे। वे अपनी बोटों पर ही शादियां भी करते हैं। हाल के दिनों में स्थानीय सरकार के प्रोत्साहन के बाद टांका समूह के कुछ लोग समुद्र किनारे बनाए गए घरों में रहने लगे हैं लेकिन अधिकांश लोग तैरते हुए घरों में रह रहे हैं।
 

Tuesday, 25 March 2014

इलेक्शन कैम्पेन....


चुनावी महासमर में नई पारी


इस बार के लोकसभा चुनावों में नए उम्मीदवारों का बोलबाला भी कम नहीं होगा। कई नए उम्मीदवार तो जनता के लिए भी नए ही हैं और उनका करिअर ग्राफ भी राजनीति के सबक को ज्यादा गहरा नहीं दिखाता। फिर भी वे अपनी लोकप्रियता के बल पर विभिन्न राजनीतिक पार्टियों की ओर से पसंदीदा लोकसभा सीटों से चुनावी महासमर में अपनी किस्मत आजमाने के लिए कूद पड़े हैं। जानते हैं ऐसे ही लोकप्रिय कुछ लोगों के बारे में जो पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ने वाले हैं।

किरण खेर
14 जून को चंडीगढ़ के एक मध्यम वर्गीय परिवार में जन्म लेने वाली किरन खेर को लोग एक शसक्त अभिनेत्री के तौर पर जानते हैं। किरन खेर हिंदी सिनेमा के लोकप्रिय अभिनेता अनुपम खेर की पत्नी व नवोदित अभिनेता पुत्र सिकंदर खेर की मां हैं। देवदास, कभी अलविदा ना कहना, रंग दे बसंती, करन अर्जुन जैसी अवार्ड विनिंग फिल्मों में दमदार अभिनय करने वाली किरन खेर हाल ही में संपन्न हुए टीवी रियलिटी शो इंडियाज गाट टैलेंट की जज भी रह चुकी हैं। अपने एक्टिंग करिअर से खुश किरन खेर आगामी लोकसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की ओर से संसदीय क्ष्ोत्र चंडीगढ़ से चुनाव लड़ेंगी। इसी सीट से अभिनेत्री गुल पनाग भी आम आदमी पार्टी की ओर से खड़ी हो रही हैं। साथ ही कांग्रेस के कद्दावर नेताओं की श्रेणी में आने वाले पवन बंसल के भी इसी सीट से चुनाव लड़ने से यहां की चुनावी फाइट काफी रोमांचक हो चुकी है।
----------------------

रवि किशन शुक्ला

भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार कहे जाने वाले रवि किशन को कौन नहीं जानता। अपने अभिनय कौशल का लोहा मनवाने वाले रवि किशन शुरुआती दौर से ही मुखर और स्पष्टवक्ता रहे हैं। रवि किशन शुक्ला को भोजपुरी और हिंदी सिनेमा में रवि किशन के नाम से जाना जाता है। रविकिशन ने अपने करिअर की शुरुआत छोटे पर्दे से की थी। अपनी मेहनत के बल पर अपने करिअर के छोटे पर्दे को बड़ा कर हिंदी सिनेमा में कदम रखा।
करिअर के विभिन्न पड़ावों को पार करते हुए रविकिशन ने अब कांग्रेस की ओर से उत्तर प्रदेश के जौनपुर लोकसभा सीट से अपने राजनीतिक करिअर की शुरुआत करेंगे।
--------------

डॉ. कुमार विश्वास

हिंदी के एक अग्रणी कवि तथा सामाजिक के तौर पर अपनी पहचान बनाने वाले डॉ. कुमार विश्वास का जन्म 1० फरवरी उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में हुआ था। कुमार विश्वास अपनी प्रेमरस से ओतप्रोत कविताओं के कारण युवाओं में खासे लोकप्रिय हैं। चार भाईयों और एक बहन में सबसे छोटे कुमार विश्वास शुरुआत से ही साहित्य के शौकीन रहे। साहित्य के क्षेत्र में आगे बढèने के ख्याल से उन्होंने ग्रेजुएशन और हिंदी लिट्रेचर में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री गोल्ड मेडल के साथ प्रा’ की। पीएडी करने के बाद कुमार विश्वास आजकल आम आदमी पार्टी के कद्दावर कार्यकताã और शीर्ष नेता के तौर पर जाने जाते हैं। आम आदमी पार्टी की ओर से वह राहुल गांधी के चुनाव क्ष्ोत्र अमेठी से ताल ठोकेंगे। अब देखना होगा कि कुमार विश्वास का राजनीतिक करिअर कितनी सीमाओं लांघ पाएगा या फिर उठने से पहले ही दम तोड़ देगा।
-------------------

आशीष खेतान

व्यवसायी, व्यूरोक्रेट्स, अभिनेताओं और खेल जगत की हस्तियों के साथ ही मीडिया इंडस्ट्री के कद्दावर जर्नलिस्ट आशीष खेतान अपनी किस्मत का ताला खोलने की फिराक में हैं। लोकसभा चुनाव के मद्देनजर आम आदमी पार्टी ने अपने उम्मीदवारों की सूची में आशीष खेतान का नाम सबसे ऊपर रखा है। गुलाल डॉट काम के डायरेक्टर आशीष खेतान खोजी पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं। खोजी पत्रकार आशीष खेतान को नई दिल्ली सीट से पार्टी ने अपना उम्मीदवार बनाया है।
------------------

चिराग पासवान

लोक जनशक्ति पार्टी के मुखिया रामविलास पासवान के बेटे और पार्टी के संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष चिराग पासवान बिहार की जमुई लोकसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे। चिराग पासवान बॉलीवुड की फिल्म 'मिले ना मिले हम’ से अपने करिअर की शुरुआत की थी। बॉलीवुड में काम करने के अलावा चिराग लोक जनशक्ति पार्टी के लिए एक राजनीतिज्ञ के तौर पर कार्य भी करते हैं। चिराग पासवान मानते हैं कि 'अभिनय भले ही हमेशा से मेरा सपना रहा हो लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि मैं राजनीति से दूर चला जाऊंगा। मैं अपने आपको आधा राजनीतिज्ञ तो मानता ही हूं क्योंकि मैंने अपने पिता के साथ प्रचार अभियानों में बहुत काम किया है।’

नगमा

हिंदी, तमिल व भोजपुरी सिनेमा में अपनी एक्टिंग का लोहा मनवा चुकी नगमा को नंदिता मोरारजी और नम्रता सदाना जान के नाम से भी जाना जाता है। नगमा का जन्म 25 दिसंबर को मुंबई में हुआ था। 199० के दशक में नगमा का करिअर अपने चरम पर था। नगमा की मां जाति से मुससमान थी और पिता हिंदू थ्ो। नगमा ने अपने करिअर में भारत के लगभग सभी भाषाओं में फिल्में की हैं। नगमा के अनुसार उन्होंने हिंदी, तेलुगू, तमिल, कन्नड़, मलयालम, बंगाली, भोजपुरी, पंजाबी, और मराठी जैसी भारतीय भाषाओं में काम किया है।
नगमा की सफलता इस बात से ही झलकती है कि उन्हें फिल्म फेयर पुरस्कार व तमिल की सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरष्कार प्रदान किया जा चुका है।
अपने अभिनय करिअर के बाद अब नगमा मेरठ सीट से कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर लोकसभा का चुनाव लड़ेंगी। नगमा के अनुसार वह केवल सेलीब्रिटी के बल पर चुनाव लड़ने नही आई हैं बल्कि अपने काम के बल पर चुनाव लड़ने आई हैं। मैं पिछले दस साल से पार्टी के लिए काम कर रही हूं। उन्होंने कहा कि जिस तरह हम फिल्मों में काम करते हैं उसी तरह हम राजनीति मैं भी बेहतर काम करके दिखलाएंगे।

कमाल खान

खुद को एसआरके की तर्ज पर केआरके कहलवाना पसंद करने वाले कमाल खान इस बार समाजवादी पार्टी की ओर से नार्थ वेस्ट मुंबई से चुनाव लड़ेंगे। यहां पर शिवसेना युवा और तेजतर्रार नेता गजानन कीर्तिकर ताल ठोकते नजर आएंगे। इस सीट को शिवसेना का गढ़ माना जाता रहा है। जबकि कांग्रेस ने भी इस संसदीय क्ष्ोत्र से कर्मठ नेता गुरुदास कामत को म्ौदान में उतारा है। इसलिए कमाल खान को यहां से कड़ी टक्कर मिलने के आसार साफ नजर आते हैं।
कमाल खान हम्ोशा गलत कारणों से ज्यादा चर्चा में रहते हैं। उनकी बदमिजाजी के किस्से अकसर सामने आते रहते हैं। 25 अप्रैल को पटियाला में जन्में कमाल खान ने अपने करिअर की शुरुआत एक गायक के तौर पर की थी। अपनी शुरीली आवाज के दम पर वर्ष 2०1० में सिंगिंग रियलिटी शो गा सा रे गा मा पा जीता।
-------------------

गाला जयदेव

पिछले 3० सालों से कार्पोरेट जगत में अपना लोहा मनवाने वाले गाला जयदेव चित्तूर जिले के रहने वाले हैं। कार्पोरेट जगत म्ों गाला जयदेव के नाम से चर्चित जयदेव ने इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया है। अमारा राजा बैट्रीज समूह के उपाध्यक्ष और प्रबंध निदेशक गाला जयदेव तेलगू देशम पार्टी की ओर से गुंटूर लोकसभी सीट से उम्मीदवार होंगे।

मोहम्मद कैफ
क्रिकेट के मैदान में चीते सी चपलता और अपने अभूतपूर्व कौशल के लिए प्रसिद्ध मोहम्मद कैफ सभी के लिए चिरपरिचित नाम है। राजनीति के पिच पर उत्तर प्रदेश के फूलपुर संसदीय क्ष्ोत्र से कांग्रेस के प्रत्याशी के तौर पर शुरुआत कर रहे मोहम्मद कैफ कहते हैं कि जिस तरह से वह क्रिकेट के मैदान में विरोधियों के हौसले पस्त कर देते हैं। ठीक उसी तरह राजनीति की पिच पर वह सभी को पराजित कर देंगे। हालांकि कौन किसको पराजित कर पाएगा ये तो चुनाव के नतीजों के बाद ही पता चल पाएगा।
उत्तर प्रदेश के अंतराष्ट्रीय क्रिकेट खिलाड़ी मोहम्मद कैफ के अनुसार राजनीति उनके कैरियर की दूसरी इनिग होगी जिसे वह उतनी ही गंभीरता से खेलेंगे जितनी गंभीरता से उन्होंने क्रिकेट खेली है।

नंदन नीलेकणि

इन्फोसिस के सह अध्यक्ष और संस्थापक सदस्यों में से एक नंदन नीलेकणि का नाम उद्योगपतियों में ससम्मान लिया जाता है। यूनिक आडेंटिफिकेशन यानी आधार कार्ड प्राधिकरण के अध्यक्ष रहे नंदन नीलेकणि का जन्म 2 जून को बंगलुरु में हुआ था। भारत सरकार द्बारा 2००6 में नीलेकणि को विज्ञान एवं अभियांत्रिकी के क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान देने के लिए पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। आईटी और कार्पोरेट जगत का चेहरा माने जाने वाले नीलेकणि कांग्रेस की ओर से बंगलुरु साउथ सीट से चुनाव मैदाने में होंगे।
------------

बाईचुंग भूटिया

भारतीय अंतर्राष्टीàय फुटबॉल खिलाड़ी बाईचुंग भूटिया को भारतीय फुटबाल जगत में धूमकेतु की भांति माना जाता है। भूटियाय का जन्म 15 दिसंबर को सिक्किम के एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था। छोटी उम्र से ही वाईचुंग को फुटबॉल खेलना पसंद था। 16 वर्ष की उम्र में अपने अभूतपूर्व प्रदर्शन से संतोष टाफी के संभावितों में शामिल होने वाले पहले फुटबॉलर बने। अपने अभूतपूर्व कौशल व भारतीय फुटबाल को दिए गए योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया। अपने खेल करिअर से सन्यास लेने के बाद अब भूटिया दार्जिलिंग लोकसभा सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार होंगे।





Sunday, 23 March 2014

प्यार...शहीदे आजम का


उसे बंदूक से प्यार था
उसमें भरे तांबे के छर्रों से प्यार था
कट्टे के ठट्ठे से प्यार था
उसकी वफा पे एतबार था

अहले वतन से प्यार था
हरियाले खेतों-सूखे खलिहानों से प्यार था
सोंधी मिट्टी से दुलार था
स्कूल की छुट्टी से प्यार था

उसे इज्जत से प्यार था
सितारे हिंद से करार था
उसे गैरोंे से प्यार था
अपनों से दिलेबहार था

उसे अमन की खुशबू से प्यार था
उड़ते खयालों से प्यार था
उसे हर उस शख्स से प्यार था
जिसमें अमन की बिसात थी

उसे उससे प्यार था
जिससे लोग डरते थे
कांपते-भागते थे, थरथराते थे
उसे तो देश पे मिटने का शौक था

उस शहीदे आजम को
मेरा सलाम जिसे
खुद की मौत से कम
हमारी जिंदगी से ज्यादा प्यार था

 

पेड़ जो लेता है जान

धरती का सबसे जहरीला पेड़

मेंचीनील  को दुनिया का सबसे जहरीला पेड़ माना जाता है। यह कैरेबियन सागर के आस-पास और बाहमास में पाया जाता है। इस पेड़ को दुनिया के सबसे जहरीले वृक्ष के रूप में गिनीज ऑफ वर्ल्ड रिकॉड्र्स में शामिल किया गया है। लोगों को इन पेड़ों से दूर रखने के लिए इन पर चेतावनी बोर्ड लगाए जाते हैं। इसको मेंचीनील नाम इसके सेब जैसे छोटे फलों के कारण मिला है। माना जाता है कि क्रिस्टोफर कोलंबस ने मेंचीनील के सेब जैसे फल को 'मौत का छोटा सेब’ नाम दिया था। इसकी ऊंचाई काफी होती है। यह दिखने में काफी चमकदार होता है। इसकी पत्तियां अंडाकार होती हैं।
 
वनस्पति विज्ञानियों के मुताबिक इस पेड़ का सबसे विषैला भाग इसके फल होते हैं। यदि इसके फल के रस कि एक बूंद भी त्वचा पर गिर जाए तो त्वचा वहां से फट जाती है और बहुत जलन होती है। यहां तक कि इसके फलों को जलाने से निकलने वाले धुएं से इनसान अंधा हो सकता है और यदि कोई एक पूरा फल खा ले तो उसकी तत्काल मौत भी हो सकती है। इतना ही नहीं यदि आप बरसात में इस पेड èके नीचे खड़े हो जाएं तो आपके पूरे शरीर में खुजली और जलन हो शुरू हो जाएगी।
 
रेडियोलॉजिस्ट निकोला एच स्ट्रिकलैंड ने मेंचीनील के बारे में बताया है कि टोबैगो के कैरेबियन द्बीप के बीच पर उन्हें एक गोलाकार फल पड़ा मिला था। यह एक काफी लंबे पेड़ से गिरा था। इसमें सिल्वर कलर की तिरछी लाइनें थीं। उन्होंने इसे जरा सा खाया। कुछ पलों के बाद विचित्र ढंग का स्वाद महसूस हुआ और भारी जलन के साथ काटने जैसी संवेदना होने लगी और गला बुरी तरह अकड़ने लगा। तुरंत इलाज के 8 घंटे बाद सूजन कम हुई। विश्व के सबसे जहरीले पेड़ मेंचीनील के बारे में कहा जाता है कि स्पेन का जुआन पोंस डी लियोन ने 1521 में सोने के बड़े भंडार वाले इलाके की खोज की। सोने के लालच में यहां के लोगों ने जुआन को इसी पेड़ के जहरीले तीर से मौत के घाट उतार दिया था।
 

मुल्क