Sunday, 30 June 2013

गाड़ी बुला रही है, सीटी बजा रही है



 
 

ऑटोमोबाइल : वाहनो में है सफल जिंदगी


रिजवान खान

माडर्न होते समाज में लोगों की जिंदगी भी माडर्न हो चुकी है, और भागमभाग भी बढ़ चुकी है, जिस कारण लोगों के पास समय की कमी हो रही है। इस भाग-दौड़ भरी जिदगी में मोटर वाहन लगभग हर व्यक्ति के लिए जरूरी हो चुका है। ऐसे में लोग माडर्न वाहनों का प्रयोग करना चाहते हैं। लोगों की वाहनों के प्रति बढ़ती दीवानगी ने ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग के क्ष्ोत्र को काफी हद तक पहले से ज्यादा मजबूत और विस्तृत बना दिया है। वाहनो की बढ़ती डिमांड ने इनके मेंटीनेंस, साइज, रख-रखाव, कलर व डिजाइंस के प्रति लोगों को संजीदा कर दिया है। जिस कारण इस प्रोफेशन में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है, और ऐसे प्रोफेशनल्स मांग भी, जो इससे जुड़े कार्यों को सही ढंग से पूरा कर सकें और जरूरी डायरेक्शन कार्य को संजीदगी से अंजाम दे सकें। इस काम को अंजाम देने वाले प्रोफेशनल्स ऑटोमोबाइल इंजीनियर कहलाते हंै।
अवसर हैं अपार
देश में बढ़ रहे वाहनों के कारण आज बाजार में ऑटोमोबाइल इंजीनियरों के लिए रोजगार के उजले अवसर उपलब्ध हैं। इस समय भारत दुनिया भर में अपने टू एवं थ्री व फोर व्हीलर्स समेत हैवी व्हीकल्स की उच्च गुणवत्ता की वजह से नं. वन की श्रेणी में आंका जाता है। भारतीय युवाओं में दोपहिया वाहनो का क्रेज हद से ज्यादा है इस कारण यहां बाइक्स के नये-नये माडल्स की डिमांड में तेजी आई है। पिछले एक दशक में भारत ने इस क्ष्ोत्र में रिकार्ड प्रगति की है। इस दौरान दुनिया की सबसे सस्ती कार नैनो को सफलता पूर्वक बनाने और उसकी रिकार्ड बिक्री से भारत ने इस क्ष्ोत्र में अपना परचम लहराया है। इस प्रोफेशन में लगातार हो रही बड़ोत्तरी ने इस क्ष्ोत्र में करिअर के नये अवसर युवाओं को उपल्ब्ध कराए हैं। देश में लगातार ग्रोथ कर रही इस इंडस्ट्री ने ऑटोमोबाइल की दुनिया को विस्तृत कर दिया है, आज युवा इस क्ष्ोत्र में सफलता की नई इबारत लिख रहे हैं।
फैला है दायरा
भारत स्पोर्ट यूटीलिटी व्हीकल्स के निर्यात के मामले में दुनिया का केंद्ग बिंदु बन रहा है, कम लागत के कारण सस्ते वाहनो को तैयार करने की वजह से यहां के वाहनो का निर्यात यूरोप, साउथ अफ्रीका, साउथईस्ट एशिया में करता है। भारत की छोटी कारें यूरोप में निर्यात की जाती हैं। आटोमोबाइल इंडस्ट्री की ग्रोथ के मामले में भारत आज अन्य देशों की तुलना में बड़ा निर्यातक बन चुका है। डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्रियल पॉलिसी एंड प्रमोशन के अनुसार भारतीय आटोमोबाइल इंडस्ट्री ने वर्ष 2००० से वर्ष 2०13 तक चार पर्सेंट की ग्रोथ कर ली है। और आने वाले पांच वर्षों में भारतीय छोटे व हल्के वाहनो के बाजार में लगभग 18 पर्सेंट की ग्रोथ हो सकती है।
इस समय विदेशी ऑटोमोबाइल कंपनियां भारत में अपने प्लांट लगा रही हैं, जो कि इस क्ष्ोत्र में युवाओं के लिए रोजगार के नये रास्ते खोल रही हैं, हालांकि इस क्ष्ोत्र में भारतीय कंपनियां टाटा मोटर्स, अशोक लीलैंड, मारूति, महिंद्रा एंड महिंद्रा भी नित नये प्रयोग कर ऑटोमोबाइल से जुड़े युवाओं को नये अवसर उपल्ब्ध करा रही हैं। इंडस्ट्री की ग्रोथ को देखकर साफतौर से कहा जा सकता है, कि इस प्राफेशन में करिअर की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।
कार्यक्ष्ोत्र
ऑटोमोबाइल के क्षेत्र में कंप्टीशन अब पहले से काफी बढ़ गया है। इसलिए यह क्ष्ोत्र बहुत ही चुनौतीपूर्ण बन चुका है। कार या फिर अन्य किसी वाहन को डिजाइन करना इंजीनियर्स के लिए एक सपने की उड़ान की तरह है। इनको डिजाइंस करते समय वाहनों के फीचर्स पर काफी ध्यान देना होता है, और कस्टमर्स की पसंद का ख्याल भी रखना पड़ता है। इनके कार्यक्ष्ोत्र में व्हीकल्स की स्पीड, स्टाइल, कलर, फ्यूल सिस्टम समेत अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं को बेहतर करना होता है। आमतौर पर एक सफल ऑटोमोबाइल इंजीनियर ही कार या किसी अन्य वाहन के नए डिजाइन को डेवलप करने का कार्य करते हैं।
प्रवेश योग्यता व संस्थान
यदि आपकी इच्छा ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग में करिअर सवांरने की है, तो आप निसंदेह ऑटोमोबाइल इंजीनियरिग के कोर्स में एडमिशन ले सकते हैं। ऑटोमोबाईल इंजीनियरिंग में डिग्री के साथ-साथ डिप्लोमा कोर्सेस भी संस्थानों द्बारा संचालित किए जा रहे हैं। जहां ऑटोमोबाइल इंजीनियरिग के डिग्री कोर्स में बारहवीं गणित विषयों से पास छात्र दाखिला ले सकते हैं। वहीं तीन वर्षीय डिप्लोमा पाठ्यक्रम के लिए छात्रों को दसवीं पास होना जरूरी है। लगभग सभी संस्थानों में इन कोर्सों में एडमीशन के लिए प्रवेश परीक्षा भी आयोजित की जाती है।
बीटेक या बीई में बारहवीं (पीसीएम) के बाद आईआईटी-जेईई या एआईईईई क्वालिफाई करके एडमिशन लिया जा सकता है। आईआईटी, दिल्ली से इंडस्ट्रियल डिजाइनिग में मास्टर डिग्री (दो वर्षीय) हासिल कर सकते हैं। आईआईटी, कानपुर भी इंडस्ट्रियल डिजाइनिग में दो वर्षीय मास्टर डिग्री कोर्स करवाती है। इसके अलावा, इंडस्ट्रियल डिजाइन सेंटर, आईआईटी-मुंबई से इंडस्ट्रियल डिजाइनिग में मास्टर डिग्री (दो वर्षीय) प्राप्त कर सकते हैं। आईआईटी गुवाहाटी से बीटेक इन ऑटोमोबाइल डिजाइनिग के चार वर्षीय पाठ्यक्रम में प्रवेश ले सकते हैं। आप चाहें, तो प्राइवेट इंजीनियरिग इंस्टीट्यूट से भी ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग के कोर्स में दाखिला ले सकते हैं। जबकि महाराष्ट्र इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन ऑटोमोटिव डिजाइन (पीजीडीएडी) कोर्स में एडमिशन लिया जा सकता है।

Saturday, 29 June 2013

मुसीबत में साथी




 आपदा प्रबंधन में करिअर



पूरे संसार में छोटी-बड़ी आपदाएं आती रहती हैं, और इनमें जान-माल की बड़े पैमाने पर नुकसान भी होता है। उत्तराखंड की स्थित खुद इस बात को बयां कर रही है। इनमें प्राकृतिक आपदाएं जैसे बाढ़, सूखा, भूस्खलन, समुद्री तूफान आदि शामिल हैं। जाहिर है, इस प्रकार की विपदाओं को कम से कम सामना करना पड़े और समस्या की स्थिति में नुकसान को कम करने एवं पीड़ित लोगों की मदद कैसे की जाए, इस बारे में समस्त देशों की सरकारें और स्वयं सेवी संगठन काफी गंभीरता से रणनीतियां तैयार करने में लगे हुए हैं।
कार्यक्ष्ोत्र
डिजास्टर मैनेजमेंट या आपदा प्रबंधन के कार्यक्षेत्र में सिर्फ आपदा के बाद के पुनर्निर्माण के कामकाज को संभालना या पीड़ित व्यक्तियों की मदद करना भर नहीं होता है बल्कि आपदा की पहले से ही सूचना देने की स्थिति का विकास और होने वाले नुकसान को कम करने व आपदा को टालने के विकास में योजना बनाने का कार्य भी शामिल होता है।
प्रवेश योग्यता
इस क्ष्ोत्र में करिअर बनाने के लिए प्रोफेशनल्स को कठिन परिस्थितियों में तैयार रहने के अलावा मुश्किल हालात में जुझारू प्रवत्ति का होना जरूरी है। इस क्ष्ोत्र में प्रवेश के लिए श्ौक्षिक योग्यता बारहवीं है लेकिन अगर आप ग्रेजुएट हैं तब भी आपके पास करिअर सवांरने अपार अवसर उपलब्ध हैं। इस प्रोफे शन के अलावा शायद ही समाज कल्याण के साथ आत्मसंतुष्टि और करियर ग्राफ को भी साथ-साथ आसमान की ऊंचाइयों तक पहुंचाने का मौका कोई और क्षेत्र दे पाए। देश में ही सरकारी एवं प्राइवेट सेक्टर के संस्थान अस्तित्व में आ गए हैं। इनमें सर्टिफिकेट से लेकर एमबीए स्तर तक के कोर्स उपलब्ध हैं।
जरूरी है पूरी जानकारी
अक्सर युवा इस प्रोफेशन को अपना तो लेते, लेकिन इसके चुनौतीपूर्ण व कठिन कार्यश्ौली में खुद को फिट नहीं कर पाते, और इस प्रोफेशन से पीछा छुड़ाने लगते हैं। इसलिए इस प्रोफेशन को अपनाने से पहले इस प्राफेशन से संपूर्ण जानकारी कर लेना बेहद महत्वपूर्ण है। इस क्ष्ोत्र के प्रोफेशनल्स लोगों की जिंदगी को बचाते हैं इसके लिए उन्हें खुद की जान जोखिम में डालनी पड़ती है। क्षतिग्रस्त या पीड़ित लोगों की पुर्नस्थापना तथा लोगों के जीवन को दुबारा सामान्य स्तर पर पहुंचाने के लिए प्रोफेशनल्स से अपेक्षाएं भी की जाती हैं। तो देखा जाए तो यह कार्यक्षेत्र चुनौतियों के साथ-साथ संवेदनात्मक पहलुओं को भी खुद में समेटे हुए है।
संभावनाओं का सागर
अगर आपकी रूचि लोगों को सहायता पहुंचाने में है, उनकी मदद करने में है, इसके लिए आप किसी भी हद तक जा सकते हैं। तो निश्चित ही यह प्रोफेशन आपके करिअर के लिए बेहतर साबित होगा। इस प्रोफेशन के तहत आपको प्रबंधन के सारे कार्यकलापों से अवगत कराया जाता है। इसके अलावा आपको समाज कल्याण के हित में संपूर्ण संवेदनाओं के साथ जानकारी मुहैया कराई जाती है। इसीलिए जरूरी है कि ऐसे ही युवा इस दिशा में करिअर निर्माण की पहल करने के बारे में सोचें जो मानवीय संवेदनाओं को समझते हों, और समाज हित में कार्य करने का जज्बा हो।
सरकार कर रही सहयोग
भारत जैसे विकासशील देशों में अक्सर ऐसे छोटे-बड़े हादसे तथा अन्य प्राकृतिक आपदाओं से विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को गुजरना पड़ता है। यही कारण है कि देश में आपदा प्रबंधन का एक अलग से प्राधिकरण केंद्र सरकार के स्तर पर विकसित किया गया है और इसी की शाखाएं तमाम राज्यों में बनाई जा रही हैं। इस कार्य के लिए सरकार की ओर से पर्याप्त धनराशि भी समय-समय पर मुहैया करा रही है और इस क्ष्ोत्र के प्रोफशनल्स को रोजगार के नये अवसर भी प्रदान कर रही है, इसके लिए बाकायदा नेशनल डिजास्टर रेस्क्यू फोर्स का गठन भी किया जा चुका है, युवाओं को इसमें भारी संख्या में शामिल कर रोजगार उपलब्ध कराया जाता है।
कठिन ट्रेनिंग
आपदा प्रबंधन में करिअर संवारने के लिए आपको कठिन ट्रेनिंग प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। ट्रेनिग में प्रमुख तौर पर कुछ अहम पहलुओं पर ध्यान दिया जाता है।
आपदा के कुप्रभाव को कम से कम करने पर ध्यान देना।
आपदाग्रस्त लोगों को तुरंत बचाव एवं राहत की व्यवस्था।
प्रभावित लोगों की पुर्नस्थापना और भविष्य में आने वाली आपदाओं से समय रहते कैसे निपटा जाए इसकी जानकारी मुहैया करना।
देखा जाए तो इस ट्रेनिग में कम समय में एक्शन लेने की कार्ययोजना और समस्त संसाधनों को एक प्रबंधक की तरह बहुत ही प्रभावी ढंग से संचालित करने पर ज्यादा जोर होता है।

शिक्षा संस्थान
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजास्टर मैनेजमेंट, नई दिल्ली।
डिजास्टर मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट, भोपाल।
डिजास्टर मिटिगेशन इंस्टीट्यूट, अहमदाबाद।
सेंटर फार डिजास्टर मैनेजमेंट, पुणे।
इंस्टीट्यूट ऑफ डिजास्टर मैनेजमेंट एंड फायर सर्विसेज, चंडीगढ़।





Thursday, 27 June 2013

फिटनेस है तो रिलैक्स है


बनाइए दूसरों की सेहत और अपना करिअर



आज हर छोटे बड़े शहर में फिटनेस सेंटर खुल रहे हैं, इसका प्रमुख कारण लोगों का अपनी हेल्थ को लेकर अवेयर होना माना जा रहा है। इस कारण फिटनेस टेàनर के प्रोफेशन ने एक कमाउ प्रोफेशन के रूप में अपने पांव पसारे हैं। इस क्ष्ोत्र के बढ़ते दायरे का एक और अहम कारण बालीवुड को माना जा रहा है। जहां हीरो की सिक्स पैक एब्स बाडी देख युवा भी उस तरह की बाडी पाने के लिए फिटनेस सेंटरों व जिम हाउसों की ओर रूख कर रहे हैं, और भारी रकम चुका वैसी ही फिजिक स्टाइल पाना चाहते हैं। इस कारण यह प्रोफेशन काफी कमाई वाला साबित हो रहा है, अगर आप की भी रूचि इस क्ष्ोत्र में है तो निसंदेह यह क्ष्ोत्र आपको सैटिस्फैक्शन के साथ-साथ कमाई के मामले में भी बेहतर साबित होगा।

संभावनाएं है ज्यादा

बढ़ते पॉल्यूशन और कॉर्पोरेट कल्चर से तेज रफ्तार होती जिदगी में लोग अपनी सेहत के प्रति अब पहले से बहुत ही ज्यादा सजग हो गए हैं। रोज पैदा हो रही नई बीमारियों के बढ़ रहे खतरे से लोग अपनी सेहत की चिता पहले से ज्यादा करने लगे हैं। इसके लिए वे फिटनेस सेटरों का सहारा लेते हैं। आमतौर पर अब खुद को फिट रखना एक जरूरत बन चुकी है, कई तो सिर्फ दिखावे के लिए ही फिटनेस सेंटरों का रूख कर लेते हैं। इस क्षेत्र में भी युवाओं के लिए करिअर के कई अवसर दरवाजा खोले खड़े हैं।

कार्यक्ष्ोत्र

एक फिटनेस ट्रेनर के तौर पर आपका मुख्य कार्य होता है लोगों के शरीर को उनकी चाह अनुसार बनाना और शरीर को तंदुरस्त बनाने के साथ-साथ उसे एक सही और आकर्षक श्ोप देना होता है। फिटनेस ट्रेनर के तौर पर आप ग्रुप या इंडिविजुअल को शारीरिक तौर से ट्रेंड करना होता है, इस ट्रेनिंग में ऐरोबिक्स, वेट गेन/वेट लूज,के साथ ही बाडी की मशल्स को लचीला बनाना होता है।

रोजगार की कोई कमी नहीं

टैलेंटेड टàेनर्स के लिए इस क्ष्ोत्र में रोजगार की कोई कमी नहीं है। आमतौर पर एक फिटनेस ट्रेनर को जिम सेंटर्स, बड़े-बड़े होटल्स, हेल्थ क्लब, स्पा सेंटर्स व रिजार्ट्स में आसानी से काम मिल जाता है। बाडी फिटनेस में रुचि रखने वाले युवा इसके साथ कंप्यूटर, और तकनीकी ज्ञान हासिल कर बेहतर करिअर बना सकते हैं। फिटनेस के क्षेत्र में अब पहले से ज्यादा अवसर उपलब्ध हैं। कई सारे बाडी बिल्डिंग चैंपियनशिप और कंप्टीशन भी आयोजित किए जाने लगे है। देश के सभी शहरों में जिमों की संख्या बढ़ रही है। इसलिए यह प्रोफेशन रोजगार के मायने में युवाओं के लिए बहुत ही फायदेमंद हो सकता है। इस क्ष्ोत्र में आए परिवर्तन ने इस प्रोफेशन में करिअर की राह को काफी बेहतर कर दिया है। फिटनेस सेंटरों के बढ़ने से फिटनेस ट्रेनरों, फिटनेस इंस्ट्रक्टर्स की मांग भी दिनोदिन बढ़ती जा रही है।

कं पनियां भी रख रहीं टेàनर

कार्पोरेट कंपनियां भी मान चुकी हैं कि कर्मचारियों की सेहत का ध्यान रखा जाना बहुत जरूरी है, इसलिए कई बड़ी कंपनियां अपने कर्मचारियों के लिए नियमित चेकअप कैंप लगवाती हैं। कई कंपनियों में फिजिकल ट्रेनर भी रखे जाते हैं।

खुद का सेंटर

स्वास्थ्य के प्रति बढ़ रही जागरूकता ने लोगों के रुझान को फिटनेस सेटरों की ओर कर दिया है, जिस कारण दिन पर दिन इन सेंटरों की संख्या और ट्रेनरों की मांग भी बढ़ती जा रही है। इस प्रोफेशन को अपनाने के साथ ही आप अपना खुद का फिटनेस सेंटर भी खोल सकते हैं, और अपनी कमाई को अपनी मेहनत और चाह के बल पर कई गुना बढ़ा सकते हैं।

प्रवेश योग्यता और कमाई

वैसे तो इस क्ष्ोत्र में इंट्री करने के लिए कोई विश्ोष योग्यता की जरूरत नहीं होती है। इस प्रोफेशन को अपनाने के लिए सबसे पहले आपको शारीरिक तौर से फिट होना जरूरी है, साथ ही बेहतरीन कम्युनिकेशन स्किल भी इस क्ष्ोत्र में सफल मुकाम बनाने के लिए बेहद जरूरी है। इसके अलावा अगर आप शारीरिक शिक्षा विषय से ग्रेजुएट हैं तो यह आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। आज देश में कई शिक्षा संस्थान फिटनेस से जुड़े सर्टीफिकेट, डिप्लोमा व डिग्री कोर्स भी संचालित कर रहे हैं। इस प्रोफशन से जुड़े युवाओं को आकर्षक वेतन मिलता है। इनका वेतन इनकी जॉब लोकेशन व कंडीशन पर भी डिपेंड करता है।

फिटनेस संबंधी कोर्स संचालित करने वाले संस्थान

इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट आफ फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोटर्स साइंस, दिल्ली।
लक्ष्मीबाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिकल एजुकेशन, त्रिवेंद्रम, ग्वालियर।
साई,नेताजी सुभाष चंद्र नेशनल इंस्टीट्यूट आफ स्पोर्ट, पटियाला, कोलकाता, बंगलौर।
गोल्ड जिम इंस्टीट्यूट, मुंबई।
इंडियन एकेडमी आफ फिटनेस ट्रेनिंग सेंटर, कर्नाटक।




Tuesday, 25 June 2013

दस बहाने करके ले जाओ जॉब


जॉब पाने के टेन टिप्स


अगर आपके पास सभी जरूरी योग्यताएें और डिग्री के होने के बावजूद भी नौकरी नहीं मिल रही है, पूरे प्रयास करने के बाद भी आप जॉब मार्केट में कंपनियों का ध्यान आकर्षित नहीं कर पा रहे हैं, और साथ ही आप इंटरव्यू में सफल भी नहीं हो पा रहे हैं तो आपको सेल्फ एनालिसिस करने की जरूरत है।
इससे आप अपनी खूबियों को पहचान सकेंगे और उन्हें जॉब्स ढूंढने में उपयोग कर पाएेंगे। कुछ खास बातें जो आपको नौकरी दिलाने में हेल्पफुल साबित हो सकती हैं।

आकर्षक हो रिज्यूमे व कवरिंग लेटर-

सेलेक्शन पान्ो के लिए आपके रिज्यूमे का आकर्षक होना बेहद जरूरी है। अपनी खूबियां संक्षेप में ही रख्ों, जो सच हो वही एड करें, बढ़बोलापन आपके लिए घातक साबित हो सकता है। आपने प्रोफाइल को थोड़ा आकर्षक बनाएं, रिज्यूमे के करेंट लेआउट का प्रयोग करें। कवरिंग लेटर में ग्रामेटिकल मिस्टेक न करें, इससे बैड इफेक्ट पड़ता है, साथ ही दर्शाएं की यह जॉब आपके लिए जरूरी है और आप कंपनी के लिए के कितने फायदेमंद हो सकते हैं।

कम्युनिकेशन बढ़ाएं- 

सोशल नेटवîकग वेबसाइट्स पर सक्रिय रहें। लोगों से मिलें। हर जॉब पोर्टल पर अपनी उपस्थिति दर्ज करवाएं। नौकरी की अपनी जरूरतों को स्पष्ट रूप से बता देना चाहिए। ई-मेल या फोन करने की बजाय लोगों से सीधे मिलें। इससे आपका प्रभाव लोगो पर अच्छा पड़ेगा।

जान लें कंपनी के बारे में- 

आप जिस कंपनी में नौकरी करना चाहते हैं और इंटरव्यू देने जा रहे है, तो उसके वर्क कल्चर, टर्नओवर और हायरिग प्रोसेस के बारे में जानकारी जुटा लें। ताकि इंटरव्यू के दौरान आपको सहझता हो।

खुद का ब्रांड बनाएं

खुद की प्रोफाइल इंटरनेट साइट्स पर बनाएं। लिंक्डइन, फेसबुक, गूगल प्लस आदि पर अपनी आमद दर्ज कराएं। विजुअल सीवी का प्रयोग करें और सामने वाले से पॉजिटिव तरीके से कम्यूनिकेट करें, साथ ही अपना कांफीडेंस हाई रख्ों। इससे सामने वाले पर आपकी पाजिटिव इमेज बनेगी, जो आपके लिए फायदेमंद ही साबित होगा।

जॉब ओरिएंटड साइट्स

इंटरनेट पर मौजूद जॉब साइट्स पर रेगुलर विजिट करें, साथ ही कंपनियों की जॉब साइट्स पर भी अपनी आमद दर्ज कराते रहें। जॉब सर्च इंजिंस का इस्तेमाल करें, जॉब बैंक्स पर भी रेगुलर विजिट करना आपके लिए श्रेयस्कर रहेगा।

जोश के साथ नौकरी खोजें

नौकरी के प्रति आपका ढीला रवैया आपको नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए जॉब सर्च इंजिन्स का इस्तेमाल करें। और उन पर प्रोफाइल अपने इंट्रेस्ट व लोकेशन के अनुसार ही हमेशा अपडेट करते रहें।

जॉब सर्च टूल्स का करें प्रयोग

आज कल हर किसी के पास हाई-फाई एप्लीकेशंस से युक्त व टेक्नोलॉजी से लबरेज गैजेट्स हैं तो लेकिन वह इसका खुद के हित में प्रयोग नहीं कर पा रहा है। आज तमाम तरह की एप्लीकेशंस मोबाइल्स व लैपटॉप में मौजूद हैं जो जॉब ढूंढने में अहम रोल अदा करती हैं लेकिन इसके लिए हमारा जानकार होना बेहद जरूरी है।

लिस्ट बनाएं

जिस तरह की कंपनी में आप काम करना चाहते हैं, उन कंपनियों की एक सूची बनाएं, और बारी-बारी उनसे कांटेक्ट करते रहें व समय पड़ने पर विजिट भी कर लें। कंपनीयों की प्रॉपर लिस्टिंग आपको काफी हद तक फायदा पहुंचा सकती है।

अपनी खूबियों को पहचानें-  

नौकरी ढूंढने से पहले आपको अपनी खूबियों की बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए। इस बात की भी जानकारी रखें कि आज जॉब्स देने वाली कंपनियों की जरूरतें क्या हैं। आजकल एक नौकरी के लिए हजारों आवेदन आते हैं, ऐसे में आपमें कुछ खास योग्यताएं होनी चाहिए , ताकि आप वह जॉब हासिल कर सकें।

ऑफर लेटर को ध्यान से जांचे

और आखिर में इस बिंदु पर खास तौर से ध्यान दें, नौकरी पक्की होने की खुशी हर व्यक्ति को होती है, लेकिन ऑफर लेटर को साइन करते समय उसमें मौजूद तथ्यों को जांचना बेहद जरूरी होता है। ऑफर लेटर साइन करते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रख्ों, सैलरी, वर्किंग सेड्यूल, कंपनी की लोकेशन के साथ ही वहां का वातावारण भी जानना बहुत जरूरी होता है। कई बार कंपनी का में चल रही राजनीति आपके काम और प्रगति में बाधक बन जाती है।
इस लिए ऊपर सुझाए गए बिंदुओं पर गौर करें और उन्हें अमल में लाकर नई नौकरी को इंज्वाय करें।



 

Friday, 21 June 2013

विदेश शिक्षा की पहली सीढ़ी



विदेश शिक्षा की है आस तो टफेल करो पास


अगर आपका सपना है, विदेश में पढ़ने का तो आपको गुजरना होगा टफे ल की कठिन प्रवेश प्रकिृया से। टफेल, टेस्ट ऑफ इंग्लिश एज एन फॉरेन लैंग्वेज अब सिर्फ अमेरिकन यूनीवर्सिटीज में अध्ययन के लिए ही नहीं बल्कि अन्य कई विदेशी यूनिवर्सिटियों में प्रवेश के लिए भी वैलिड हो चुका है। हावर्ड, ऑक्सफोर्ड, ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिगापुर सहित लगभग छह हजार यूनिवर्सिटी में टफेल को मान्यता मिली हुई है।
एजूकेशन टेस्टिंग सर्विस द्बारा दुनिया भर के प्रमुख देशों में टफेल टेस्ट को आयोजित किया जाता है। एजूकेशन टेस्टिंग सर्विस एक नानप्राफिट यूएस बेस्ड आर्गनाइजेशन है। जो एजूकेशन के क्ष्ोत्र में विदेश शिक्षा के लिए वर्ल्डवाइड लेवल के कई तरह के एग्जाम कंडक्ट कराती है, जिनमें से एक टफेल भी है।

एप्लाई कैसे करें

टफेल टेस्ट में एपियर होने के लिए आपको अपने लोकल सेंटर पर जाकर रजिस्ट्रेशन कराना होता है। रजिस्ट्रेशन के लिए आप एजूकेशन टेस्टिंग सर्विस की वेबसाइट ६६६.ी३२.१ॅ/३ीा’ॅ४्रीि.ँ३Þ <ँ३३स्र://६६६.ी३२.१ॅ/३ीा’ॅ४्रीि.ँ३Þ> पर आनलाइन कर सकते हैं। इसकी एग्जाम रजिस्ट्रेशन फीस हर कंट्री के लिए अलग-अलग निर्धारित है। भारतीय कैंडीडेट के लिए यह फीस 35 यूएस डालर तय की गई है।

टेस्ट फार्मेट

टफेल टेस्ट मुख्यत: दो तरह के फार्मेट में आयोजित कराया जाता है, पहला इंटरनेट बेस्ड टेस्ट [आईबीटी] और दूसरा पेपर बेस्ड टेस्ट [पीबीटी]। यह टेस्ट भारत के विभिन्न शहरों में अलग-अलग समय पर स’ाह के आखिरी दिनों शनिवार व रविवार को आयोजित कराया जाता है।

टफेल टेस्ट को चार सेक्शंस में डिवाइड किया गया है।

रीडिग- रीडिग सेक्शन में 3 से 5 लंबे पैसेज शामिल किए जाते हैं और इन पर आधारित प्रश्न दिए जाते हैं। ये पैसेज अंडरग्रेजुएट सिलेबस से लिए जाते हैं और इसमें कैं डीडेट के नॉलेज को चेक किया जाता है। इसके जरिए कैंडीडेट की अलग-अलग लेवल से चेकआउट किया जाता है, जैसे टॉपिक क्लैरिटी, पैसेज आइडिया, वोकेबलरी आदि।

लिस्निंग- इस सेक्शन के अंतर्गत स्टूडेंट्स को छह पैसेज को सुनाया जाता है। इस सेक्शन में चार एकेडमिक पैसेज के साथ दो स्टूडेंट्स के बीच बातचीत होती है। लिस्निंग सेक्शन में स्टूडेंट को पैसेज के आइडिया, डिटेल, पर ध्यान देना जरूरी होता है।

स्पीकिग- इस सेक्शन के अंतर्गत टोटल छह टास्क दिए जाते हैं, जिसमें दो टास्क स्वतंत्र रूप से करने होते हैं, जबकि अन्य टास्क ग्रुप में होते हैं। इसमें स्टूडेंट एक पैसेज पढ़ता है और दूसरा पैसेज सुनता है और फिर दोनों में संबंध बताते हुए उसको डिफाइन करता है।

राइटिग- राइटिग सेक्शन में दो टास्क दिए जाते हैं। इसमें पहला टास्क इंडीविजुअली जबकि दूसरा ग्रुप में करना होता है। इसमें स्टूडेंट्स एक पैसेज पढ़ता है और दूसरा पैसेज सुनता है। फिर दोनों पैसेज में रिलेशन को डिफाईन करते हुए अपनी ओपीनियन को लिखता है।


टेस्ट में समय सीमा व प्रश्नों की संख्या
रीडिग 3 पैसेज और 39 प्रश्न 6० मिनट
लिस्निंग 6 पैसेज और 34 प्रश्न 5० मिनट
स्पीकिग 6 टास्क और 6 प्रश्न 2० मिनट
राईटिंग 2 टास्क और 2 प्रश्न 55 मिनट

विस्त्त जानकारी के लिए वेबसाइट [६६६.ी३२.१ॅ] को देखें ।

Thursday, 20 June 2013

पास करो नेट लाइफ करो सेट





वक्त कागज और कलम की गुफ्तगू का




यूजीसी नेट, जेआरएफ एंट्रेंस एग्जाम
एग्जाम डेट : 3० जून

बस अब वक्त है आपकी मेहनत को रंग चढ़ाने का। अगर आप यूजीसी द्बारा आयोजित की जाने वाली नेशनल इलेजिबिलिटी टेस्ट [नेट] ओर जूनियर रिसर्च फेलोशिप [जेआरएफ] की परीक्षा में शामिल हो रहे हैं और बेहतर अंकों के साथ सफल होना चाहते हैं, तो आपके लिए बेहतर यही है कि इस वक्त आप सिर्फ रिवीजन करें। अगर आप रिवीजन इस कम वक्त को मैनेज करके बेहतरी से करते हैं, तो निश्चित ही आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता है। लेकिन सफलता पाने के लिए प्रॉपर प्लानिंग करनी होगी, और उसी के अनसार परीक्षा की तैयारी को यूटीलाइज करना होगा।
नेट एग्जाम में आप बेहतर परफार्म तभी कर पाएंगे, जब आप एग्जाम की तैयारी सिलेबस के अकार्डिंग करेंगे। आम तौर पर आप ने अब तक इस एग्जाम की प्रिपरेशन भी शुरू कर चुके होंगे। लेकिन अब समय है इसे फाइनल टच देने का। कई स्टूडेंट्स बेहतर पढ़ाई करने के बावजूद रिविजन के अभाव में परीक्षा में सफल नहीं हो पाते हैं। इसका मेन रीजन यह है कि वे एग्जाम प्रिपरेशन को फाइनल टच नहीं दे पाते हैं।
 

एग्जाम पैटर्न

इस एग्जाम को प्रमुख रूप से तीन पेपरों में बांटा गया है। इस परीक्षा में ऑब्जेक्टिव टाइप ही सवाल पूछे जाते हैं।

पहला पेपर

पहला पेपर जनरल एप्टीट्यूड का होता है। यह पेपर सभी कैंडीडेट्स के लिए कॉमन होता है, इसके तहत रीजनिंग, कांप्रीहेंशन, डायवर्जेंट थिंकिंग से जुड़े सवाल पूछे जाते हैं। इन सवालों के जरिए कैंडीडेट्स की नॉलेज चेक किया जाता है। यह पेपर 1०० मार्क्स व सवा घंटे की समयसीमा का होता है। इस पेपर में 6० सवाल होते हैं जिसमें से अभ्यर्थी को 5० हल करने होते हैं।

दूसरा पेपर

यह पेपर सब्जेक्ट बेस्ड होता है, इसमें कैंडीडेट द्बारा सेलेक्ट किए गए सब्जेक्ट से ही सवाल पूछे जाते हैं। इस पेपर में पचास सवाल होते हैं जोकि साल्व करना कंपल्सरी होता है। इस पेपर की समयसीमा पहले पेपर की तरह ही सवा घंटे होती है, यह पेपर टोटल 1०० मार्क्स का होता है।

तीसरा पेपर

यह पेपर भी सब्जेक्ट बेस्ड होता है। इस पेपर में कुल 75 प्रश्न होते हैं, जिनमें सभी को हल करना होता है, हालांकि यह पेपर अन्य पेपर्स की तुलना में सवा दो घंटे की समयसीमा का होता है। इस पेपर में सब्जेक्ट से जुड़ी गहन नॉलेज सवालों के जरिए चेक की जाती है। इस पेपर में 15० मार्क्स का होता है।

क्वालीफाइंग पर्सेंटेज

इस एग्जाम में जहां जनरल कैंडीडेट्स को पहले और दूसरे पेपर में 4०-4० पर्सेंट लाने होते हैं जबकि तीसरे पेपर में 5० पर्सेंट, और टोटल क्वालीफाइंग 65 लाना होता है। वहीं ओबीसी को पहले-दूसरे पेपर में 35-35 पर्सेंट व तीसरे पेपर में 45 पर्सेंट जबकि टोटल क्वालीफाइंग पर्सेंट 6० होता है। एससी व एसटी कैंडीडेट के लिए पहले-दूसरे पेपर में 35-35 पर्सेंट जबकि टोटल क्वालीफाइंग पर्सेंट 55 होता है। इसलिए कैंडीडेट्स को क्वालीफाइंग पर्सेंट को ध्यान में रखकर तैयारी करनी होती है।
 

स्पीड,एक्यूरेसी और टाइमिंग

इस परीक्षा में आप तभी सफल हो सकते हैं, जब आप स्पीड,एक्यूरेसी और टाइमिंग का ध्यान रखेंगे। ऑब्जेक्टिव टाइप के एग्जाम्स में इसकी बहुत इंपार्टेंस होती है। आपके लिए बेहतर होगा कि निर्धारित समय सीमा के अंदर प्रश्नों को एक्यूरेसी के साथ साल्व करने की प्रैक्टिस आपके लिए हमेशा फायदेमंद रहेगी।
इस परीक्षा में बेहतर मार्क्स तभी ला सकते हैं, जब आपकी अपने विषय पर पकड़ होगी। इस कारण सबसे पहले आप अपनी विषय से रिलेटेड प्रश्नों का हल करें। बाजार मे इससे संबंधित काफी पुस्तक उपलब्ध होते हैं। करेंट रिसर्च पर गहरी निगाह रखें। इस परीक्षा की तैयारी कुछ दिनों में संभव नहीं है। इसकी पूरी तैयारी आप तभी कर पाएंगे, जब आप प्लानिग से तैयारी करेंगे।
 

सब्जेक्ट पर कमांड

क्वेश्ंचस का लेवल पोस्टग्रेजुएट के सिलेबस के अनुसार ही होता है। इस लिए यह जरूरी हो जाता है कि आपको अपने विषय पर कमांड हो। बेहतर स्ट्रेटेजी मेंटेन करके आप अपनी बुक्स को रिवाइज करें। अब समय कम है बनाए गए नोट्स को दोहराएं। इस तरह की प्लनिंग से फायदा यह होगा कि आप कम समय में बेहतर तैयारी कर पाएंगे और परीक्षा के समय बेहतर प्रदर्शन करेंगे।

नोट्स प्रिपेयर करें

बाजार में इसके लिए नोट्स भी मिलते हैं। यदि आप चाहें, तो इसकी हेल्प ले सकते हैं। तैयारी के लिए इंपार्टेंट टॉपिक्स को एक जगह नोट भी कर सकते हैं। इस लिस्ट में उन्हीं को शामिल करें, जिससे हर वर्ष या सर्वाधिक प्रश्न पूछे जा रहे हैं। ऑब्जेक्टिव टाइप के प्रश्नों में कैंडीडेट्स के लिए तीन टाइप के क्वेश्चंस पूछे जाते हैं। जिनमें पहला-आसान, दूसरा-5०-5० और तीसरा लकी होता है। इसलिए आंसर सोंच समझकर लिखें।

स्कॉलरशिप

परीक्षा में मेरिट के अनुसार सबसे अधिक मार्क्स लाने वाले स्टूडेंट्स को स्कॉलरशिप प्रदान की जाती है। जहां कुछ उम्मीदवारों को जूनियर रिसर्च फेलोशिप यानी जेआरएफ, वहीं बाकी को नेट यानी नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट के लिए चुना जाता है। जेआरएफ में चुने गए स्टूडेंट्स को रिसर्च के लिए स्कॉलरशिप दी जाती है, जबकि नेट क्वालीफाई को स्कॉलरशिप नहीं मिलती। इस परीक्षा को उत्तीर्ण करने वाले स्टूडेंटस ही लेक्चरर या रीडर पद के एलिजिबल होते हैं।

आवश्यक योग्यता

अभ्यर्थियों के लिए संबंधित विषय में कम से कम 55 प्रतिशत अंकों के साथ किसी मान्यता प्राप्त यूनीवर्सिटी से पोस्टग्रेजुएट होना जरूरी होता है। एससी, एसटी तथा विकलांग व्यक्तियों के लिए 5० प्रतिशत अंकों से पोस्टग्रेजुएट होना जरूरी है। जेआरएफ के लिए उम्र सीमा 19 वर्ष से 28 वर्ष के मध्य होनी चाहिए।

[कैरियर इंडेवर एकेडमी के करिअर काउंसलर अमर यादव से बातचीत पर आधारित।]


Sunday, 16 June 2013

ऑफिस-ऑफिस चला मुसद्दी


ऑफिस में बनाएं हैप्पी माहौल, पाएं सक्सेस


हमारा वर्कप्लेस हमारे लिए बहुत ही उपयोगी होता है इसलिए वहां के माहौल को खुशमिजाज बनाए रखना हमारे लिए बेहद जरूरी बन जाता है। ऑफिस में लोग लगभग अपना पूरा दिन बिताते हैं। कुछ सहकर्मी अच्छे फ्रेंड्स भी बन जाते हैं। अब पूरा दिन उनके साथ रहने पर बातें भी खूब होती हैं। आमतौर पर ऐसा माना जाता है कि ऑफिस में फ्रेंडली एंवॉयरमेंट काम के प्रोडक्शन को इंप्रूव करता है।
आज के वर्क-कल्चर में आप चाहे किसी भी फील्ड या पोस्ट पर क्यों न हो, कंपनी आपसे हमेशा कुछ अलग और नया चाहती है। कहने का मतलब यह है कि कई कंपनियां आज ऐसे कर्मचारियों को अधिक प्राथमिकता देती हैं, जो अपने कार्य से कंपनी की ग्रोथ को इंप्रूव कर सकें। और ऐसा, आपकी कंपनी और आपके काम करने की डेस्क के माहौल पर सबसे ज्यादा निर्भर करता है।

पोस्ट योर गोल्स

इस प्रतियोगी दौर में सक्सेस तक पहुंचना बहुत ही टेड़ी खीर बनता जा रहा है। सफलता को पाने के लिए हमें कंसंटेàशन के साथ अपने काम को अंजाम देना होता है, और कंसंटेàट होने के लिए आपक ा कूल माइंड होना व आपके गोल्स का क्लियर होना बेहद जरूरी है। कहते हैं जब हमारा सपना बार-बार हमारी आंखांे में तैरता है, तभी हम उसे पूरा करने की कोशिश करते हैं। इस लिए हमारे ऊपर भी यह बात लागू हो जाती है कि हम अपने गोल्स को अपने सामने रखें ताकि हम उसे पाने की कोशिश लगातार करते रहें।

जरूरी दस्तावेज आंखों के सामने

आफिस में अक्सर काम करते हुए हम अपने बेहद जरूरी अप्वाइंटमेंट और असाइनमेंट्स को भूल जाते हैं। जिस कारण हमारा काम पीछे छूट जाता है या फिर कभी-कभी बिगड़ भी जाता है। इस तरह की समस्या से बचने के लिए हमें चाहिए की अपने जरूरी दस्तावेज हम अपनी आंखों के सामने रखें जिससे वो हमें बार-बार रिमाइंड करते रहें।

पसंदीदा फोटो रखें सामने

आमतौर पर माना जाता है कि अगर जिसे हम पसंद करते हैं या फि र हम जिसे आदर्श मानते हैं, वो अगर हमारे साथ रहते हैं तब हमारी परफामेर्ंस कई गुना बढ़ जाती है। क्योंकि हम उनसे मोटीवेट होते हैं और काम के प्रमि सकारात्मकता का दायरा बढ़ता है। इसलिए हम अपने आफिस में भी उनकी फोटो लगाते हैं जो हमारे सामने रहती है तो निश्चित तौर पर काम पर सकारात्मक असर पड़ता है और हम अपना बेहतर दे पाते हैं।

पौधों से दोस्ती

आफिस में अगर आपके आसपास कोई पौधा लगा है तो आपक े काम और आपके स्वास्थ्य में कोई गिरावट नहीं आती। क्योंकि पौध्ो ऑक्सीजन और पाजिटिव इंवायरमेंट क्रिएट करते हैं, जो हमारी तंदुरस्ती और काम के तरीके एनर्जेटिक बनाता है।

साफ-सफाई

आफिस को हमेशा पूरी तरह से क्लीन रखना चाहिए। साफ-सफाई और सुंदरता हर किसी का मन मोह लेती है। इसलिए जरूरी जाता है कि आपकी डेस्क साफ-सुथरी और चकाचक हो, जिससे आपके माइंड में सकारात्मकता का संचार होता है, और अपना सौ प्रतिशत दे पाते हैं।

पौष्टिक आहार

अगर आपको सफल इंप्लाई बनना है तो सबसे पहले जरूरत होती है, हेल्दी और पौष्टिक आहार लेने की। संतुलित डाइट आपके एनर्जी लेवल को बूस्ट करती है जिससे आप बिना थके हुए अपना कार्य पूरा कर पाते हैं। सही और पौष्टिक आहार लेने से आप हमेशा जोश से लबरेज रहते हैं और नकारात्मकता आपके आसपास फटक भी नहीं पाती। और आप अपने काम को पूरे जोश के साथ समय से पूरी कर लेते हैं। इससे आफिस में सहकर्मियों और बॉस के मन में आपके प्रति पॉजिटिव इमेज क्रिएट होती है जो आपकी प्रोगेस में चार चांद लगाती है।


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